नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जेल की स्थिति से संबंधित ताजा आंकड़े 18 मई तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जिसमें कैदियों की स्वीकृत क्षमता और भीड़भाड़ से निपटने के लिए उठाए गए कदम शामिल हैं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने हाल में एक आदेश में महिला जेलों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं का विवरण भी मांगा है, जिसमें महिला कैदियों के साथ रहने वाले बच्चों की शिक्षा और कल्याण के उपाय भी शामिल हैं। यह निर्देश जेल की स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दायर एक मामले में एमिकस क्यूरी के रूप में कार्य कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल की दलीलों के बाद दिया गया। उन्होंने बताया कि मौजूदा आंकड़े 2023 के हैं। न्यायालय ने कहा कि ताजा जानकारी में इस महीने की पहली तारीख तक की स्थिति को दर्शाया जाना चाहिए, जिसमें जेल-वार पूर्ण संख्या के आंकड़े शामिल हों। इस मामले की अगली सुनवाई 26 मई को तय की गई है।
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