तेहरान: अमेरिका ने अरब सागर में ईरान के एक ड्रोन को मार गिराया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह ड्रोन अमेरिकी युद्धपोत की तरफ बढ़ रहा था। इस घटना के बाद दोनों देशों में तनाव और बढ़ सकता है। पहले ही दोनों देशों के बीच तनातनी चल रही है और अब ड्रोन को निशाना बनाने के बाद युद्ध की आहट सुनाई दे रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच बीते कई दिनों से तनाव चल रहा है। अब यह तनाव और गहराता दिख रहा है। दरअसल अमेरिका ने अरब सागर के इलाके में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। जिस तरह से अमेरिका ने ईरान के पास अपने शक्तिशाली युद्धपोत को तैनात किया है और अमेरिका की तरफ से ईरान पर हमले की धमकी दी जा रही है, उसे देखते हुए ईरानी ड्रोन को निशाना बनाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ने की आशंका पैदा हो गई है।
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना के एक फाइटर जेट ने अरब सागर में एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन के ओर आ रहे एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया।
मंगलवार को एक ईमेल बयान में, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि ड्रोन अस्पष्ट इरादे से एयरक्राफ्ट कैरियर की ओर आक्रामक तरीके से पास आ रहा था और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में काम कर रही अमेरिकी सेनाओं द्वारा तनाव कम करने के उपायों के बावजूद वह जहाज की ओर उड़ता रहा।’
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने बताया कि ईरान का शाहेद-139 ड्रोन, अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन की तरफ बढ़ रहा था। जिसके बाद अमेरिकी नौसेना के लड़ाकू विमान एफ-35 ने उस ड्रोन को निशाना बनाकर गिरा दिया।
अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन ईरान के दक्षिणी तट से करीब 800 किलोमीटर की दूरी पर तैनात है। बयान में कहा गया है कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है।
ईरान के साथ जारी तनाव के बाद अमेरिका ने हाल ही में अरब सागर में यूएसएस अब्राहम लिंकन की तैनाती की है। यह एक स्ट्राइक ग्रुप है, जिसमें एक युद्धपोत के अलावा एस्कॉर्ट शिप और विध्वंसक जहाज फ्रैंक ई पीटरसन जूनियर, यूएसएस स्प्रुआंस और यूएसएस माइकल मर्फी भी शामिल हैं। युद्धपोत इतना विशाल है कि इस पर एक बार में 90 लड़ाकू विमान और 3200 जवान तैनात हो सकते हैं। अमेरिकी सेना ने कहा कि इस घटना से कुछ घंटे पहले ही ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अमेरिकी झंडे वाले और एक अमेरिकी क्रू वाले मालवाहक जहाज को भी परेशान किया था।
युद्धपोत की तरफ बढ़ रहे ईरानी ड्रोन को अमेरिकी सेना ने निशाना बनाया
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