22.1 C
Dehradun
Friday, May 1, 2026


spot_img

पानी के लिए मचेगा हाहाकार

नई दिल्ली। चहुंओर दिख रहे लबालब पानी के बीच इस अनमोल प्राकृतिक संसाधन की कमी की बात करना भले ही अटपटा लग रहा हो, लेकिन सच्चाई यही है कि साल के अधिकांश महीने लोगों को पानी की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। हाल ही में जारी आईआईटी गांधीनगर के शोधकर्ताओं का अध्ययन बताता है कि जलवायु परिवर्तन के चलते खाद्यान्न की खान कहे जाने वाले उत्तर भारत ने पिछले 20 साल में अपनी बहुमूल्य 450 घन किमी भूजल संपदा को स्वाहा कर दिया है।
भूजल की यह इतनी बड़ी मात्रा है, जिससे देश के सबसे बड़े जलाशय इंदिरा सागर बांध को 37 बार पूरी तरह भरा जा सकता है। इस क्षेत्र में मानसूनी बारिश की कमी और सर्दियों के अपेक्षाकृत गर्म होने के चलते फसलों की सिंचाई की भूजल पर अति निर्भरता को इसका मुख्य कारण माना गया है। यह तस्वीर हमें यह भी बताती है कि चालू मानसूनी सीजन में बरस रही अमृत बूदों को सहेजकर उसे धरती के गर्भ में पहुंचाकर इस नुकसान की भरपाई की जा सकती है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर में सिविल इंजीनियरिंग और पृथ्वी विज्ञान के प्रोफेसर और अध्ययन के मुख्य लेखक विमल मिश्रा ने बताया कि उत्तर भारत में साल 2002 से लेकर 2021 तक लगभग 450 घन किलोमीटर भूजल घट गया और निकट भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण इसकी मात्रा में और भी गिरावट आएगी। शोधार्थियों ने अध्ययन के दौरान यह पता लगाया कि पूरे उत्तर भारत में 1951-2021 की अवधि के दौरान मानसून के मौसम यानी जून से सितंबर में बारिश में 8.5 प्रतिशत कमी आई। इस अवधि के दौरान इस क्षेत्र में सर्दियों के मौसम में तापमान 0.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भूभौतिकी अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) के शोधार्थियों के दल ने कहा कि निकट भविष्य में मानसून के दौरान कम बारिश होने और सर्दियों के दौरान तापमान बढ़ने के कारण सिंचाई के लिए पानी की मांग बढ़ेगी और इसके कारण भूजल रिचार्ज में कमी आएगी, जिससे उत्तर भारत में पहले से ही कम हो रहे भूजल संसाधन पर और अधिक दबाव पड़ेगा।

शोधार्थियों ने 2022 की सर्दियों में अपेक्षाकृत गर्म मौसम रहने के दौरान यह पाया कि मानसून के दौरान बारिश की कमी के चलते भूजल पर निर्भरता बढ़ी है। साथ ही गर्म सर्दियों के कारण मिट्टी शुष्क हो रही है, जिससे फिर से अधिक सिंचाई की आवश्यकता पड़ रही है।
मानसून में बारिश की कमी और सर्दियों के गर्म होने के कारण भूजल रिचार्ज में लगभग छह से 12 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है। मिश्रा ने कहा कि इसलिए हमें अधिक दिनों तक हल्की वर्षा की आवश्यकता है। भूजल के स्तर में परिवर्तन मुख्य रूप से मानसून के दौरान हुई वर्षा तथा फसलों की सिंचाई के लिए भूजल का दोहन किए जाने पर निर्भर करता है।
अध्ययन में सामने आया कि 2009 में लगभग 20 प्रतिशत कम मानसून और उसके बाद सर्दी में तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी ने भूजल भंडारण पर हानिकारक प्रभाव डाला और इसमें 10 प्रतिशत की कमी आई। पिछले चार दशकों में सर्दियों के दौरान मिट्टी में नमी की कमी भी काफी बढ़ गई है। अध्ययनकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि निरंतर गर्मी के कारण मानसून 10-15 प्रतिशत तक शुष्क रहेगा और सर्दियां एक से पांच डिग्री सेल्सियस तक गर्म रहेंगी। इससे सिंचाई के लिए पानी की मांग में छह से 20 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए 1252 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति

0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुम्भ मेला-2027 की तैयारियों के साथ ही विभिन्न विकास योजनाओं के लिए ₹ 1252 करोड़ का अनुमोदन प्रदान...

डोल आश्रम में मुख्यमंत्री ने श्री पीठम स्थापना महोत्सव में किया प्रतिभाग, 1100 कन्याओं...

0
अल्मोड़ा/देहरादून। अल्मोड़ा जनपद के डोल स्थित आश्रम में आयोजित श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम न्यास के श्री पीठम स्थापना महोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह...

स्वामित्व योजना से वित्तीय पूंजी बने गांवों के घर, मिला 1679 करोड़ का कर्ज

0
नई दिल्ली। गांवों में आबादी क्षेत्र का भू-अभिलेख न होने के कारण गांवों के घर विवादों का कारण तो बनते थे, लेकिन वित्तीय दृष्टिकोण...

मौसम विभाग ने अगले तीन से चार दिनों के लिए उत्तर पूर्वी क्षेत्र में...

0
नई दिल्ली। मौसम विभाग ने अगले तीन से चार दिनों के लिए उत्तर पूर्वी क्षेत्र में तेज बारिश की चेतावनी जारी की है। विभाग...

‘2029 तक 50000 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा डिफेंस एक्सपोर्ट’, बोले रक्षा सचिव...

0
नई दिल्ली। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को भरोसा जताया कि भारत 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात के लक्ष्य...