22.2 C
Dehradun
Saturday, September 5, 2026


spot_img

उत्तर भारत के की टॉप यूनिवर्सिटी ग्राफ़िक एरा में अब हिंदी में हो सकेगी इंजीनियरिंग | Postmanindia

उत्तराखंड और अन्य राज्यों के हिंदीभाषी युवाओं के लिए इंजीनियरिंग करके भविष्य संवारने की एक राह खुल गई है. अपने सामाजिक सरोकारों और विश्व स्तरीय शिक्षा के लिए पहचानी जाने वाली ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी को केंद्र सरकार ने इसके लिए चुना है. नैक में ए ग्रेड पाने और देश के टॉप सौ विश्वविद्यालयों की केंद्र सरकार की सूची में स्थान पाने के बाद यह ग्राफिक एरा की एक बड़ी कामयाबी है. केंद्र सरकार ने ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी को देश के उन 14 चुनिंदा संस्थानों में शामिल किया है, जहां अब क्षेत्रीय भाषा में भी इंजीनियरिंग की पढ़ायी कराई जाएगी. केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने ट्विट करके AICTE के इस फैसले की सराहना की है और इसे नई शिक्षा नीति से जुड़ा कदम बताया है. AICTE ने हिंदी के साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं मराठी, तमिल, तेलगु, कन्नड, गुजराती, मलयालम, बंगाली, असमी, पंजाबी और उडिया में इंजीनियरिंग की पढ़ायी शुरू करने के लिए यह कदम उठाया है.

graphic era chairman sir

AICTE ने आठ राज्यों के 14 संस्थानों को इन भाषाओं में इंजीनियरिंग की शिक्षा शुरू करने की अनुमति दी है. उत्तराखंड राज्य से केवल ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी को इस नई पहल के लिए चुना गया है. देश भर में ग्राफिक एरा को सबसे ज्यादा 180 सीटों पर यह शुरूआत करने के लिए अधिकृत किया गया है. ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में कम्पयूटर साईंस इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रानिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोर्स अब साठ-साठ सीटों के साथ हिंदी में भी चलाये जाएंगे. AICTE ने उ.प्र., राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनिंदा संस्थानों को यह अवसर दिया है. ग्राफिक एरा एजुकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. कमल घनशाला ने ए.आई.सी.टी.ई. की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे हिंदी माध्यम से शिक्षा पाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए सूचना प्राद्योगिकी, कम्प्यूटर साईंस इंजीनियरिंग और मैकेनिकल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र खुल गए हैं. हिंदी माध्यम से 12वीं तक की शिक्षा पाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए हिंदी में इंजीनियरिंग करने के अवसर न होने के कारण उन्हें मजबूरन दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ता था. इस कारण काफी प्रतिभाशाली युवाओं का इंजीनियर बनने का सपना पूरा नहीं हो पाता था. अब ऐसी प्रतिभाएं भी कामयाबी के नए आयाम स्थापित कर सकेंगी. डॉ. घनशाला ने बताया कि इसी सत्र में हिंदी माध्यम से भी इंजीनियरिंग की शिक्षा शुरू की जाएगी. इसके लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं.

spot_img

Related Articles

Latest Articles

भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति की नई दिल्ली में हुई पहली बैठक भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा...

0
नई दिल्ली।  भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति- जेडीसी की पहली बैठक आज नई दिल्ली में हुई। बैठक के दौरान, दोनों देशों ने प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास,...

नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या बढ़कर 547; सीमा के दोनों तरफ...

0
नई दिल्ली। नेपाल और तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ से मृतकों की संख्या बढ़कर 547 हो गई है। 1,545 लोग अब भी लापता हैं। राहत...

भारत ने नेपाल में बचाव और राहत कार्यों के लिए 47 टन से ज़्यादा...

0
नई दिल्ली।  विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल में बुधवार को अचानक बाढ़ की त्रासदी के बाद 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो...

लोक भवन में उल्लास और आत्मीयता के साथ मनाया गया रक्षाबंधन पर्व

0
देहरादून:  रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आज लोक भवन में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि)...

मुख्यमंत्री धामी की बड़ी घोषणाः अब 60 वर्ष की आयु से महिलाओं को रोडवेज...

0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में महिलाओं की सुविधा, सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त हाईटेक...