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Wednesday, February 18, 2026


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भारत वापस लौटेगा सिंध? राजनाथ सिंह ने कहा-‘बॉर्डर्स कभी भी बदल सकते हैं’

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बंटवारे के दौरान पाकिस्तान में गया सिंध प्रांत भविष्य में भारत में शामिल हो सकता है। उन्होंने पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के उस कथन का हवाला दिया, जिसमें आडवाणी ने कहा था कि “सीमाएं स्थायी नहीं होतीं, वे बदल भी सकती हैं। कौन जानता है, कल सिंध दोबारा भारत का हिस्सा बन जाए।”
राजनाथ सिंह ने कहा कि सिंध, जिसे सिंधी समाज की मातृभूमि माना जाता है, भारतीय सभ्यता के मूल केंद्र सिंधु घाटी सभ्यता का अभिन्न हिस्सा रहा है। सिंधी समाज के एक सम्मेलन में उन्होंने कहा, “आज भले ही सिंध भारत की भौगोलिक सीमा में शामिल नहीं है, लेकिन सभ्यतागत दृष्टि से यह हमेशा भारत का अंग रहा है। जहां तक भूमि की बात है, सीमाएं समय के साथ बदलती रही हैं।”
उन्होंने सिंध क्षेत्र की महत्ता बताते हुए कहा कि सिंध के अनेक मुसलमान भी मानते हैं कि सिंधु नदी का पानी मक्का के आब-ए-जमजम से कम पवित्र नहीं है।” रक्षा मंत्री ने इस मौके पर लालकृष्ण आडवाणी का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि आडवाणी ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि उनकी पीढ़ी के सिंधी हिंदू अब तक सिंध के भारत से अलग हो जाने को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाए हैं।
उन्होंने कहा, “पूरे भारत में हिंदू सिंधु नदी को पवित्र मानते हैं। हमारे सिंधी भाइयों ने सिंधु को पवित्र बनाए रखा है। वे चाहे दुनिया में कहीं भी रहें, वे हमारे अपने हैं और हमेशा हमारे ही रहेंगे।” कार्यक्रम के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सिंधी समुदाय की सेवा-भावना और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि समुदाय ने भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सीएए से शरणार्थी हिंदुओं को मिला हक राजनाथ ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में लगातार हिंसा का सामना कर रहे अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए सीएए लाना जरूरी कदम था।
हिंदू समुदाय को मदद की जरूरत थी, लेकिन इसे दरकिनार किया गया और पीएम नरेन्द्र मोदी ने उनकी पीड़ा को समझा। 2020 से लागू है सीएए, सीएए का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करना है। शर्त ये है कि ये 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में आए हों।

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