36.8 C
Dehradun
Friday, June 26, 2026


spot_img

जर्मनी से वापस आएंगे चोल साम्राज्य के 1300 वर्ष पुराने ताम्र पत्र, शासकों ने शक्तिशाली हिन्दू साम्राज्य का किया था निर्माण

नई दिल्ली। चोल साम्राज्य (Chola Empire) से जुड़े वे ताम्र पत्र देश में वापस आएंगे, जो 1300 साल पुराने हैं। इन ताम्र पत्रों पर राजाज्ञा लिखी हुई हैं। ये जर्मनी के लाइडन विश्वविद्यालय (Leiden University) में मौजूद हैं। ये अंग्रेजों के शासन के समय भारत से जर्मनी में ले जाए गए थे। मगर चोरी करके नहीं गए थे। भारत सरकार इन्हें वापस लाने के लिए गंभीर है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को इस पर काम करने के निर्देश दिए हैं। लोकसभा चुनाव के बाद इन्हें वापस लाने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। यह पहल तमिलनाडु सरकार के अनुरोध पर हो रही है। तमिलनाडु सरकार ने इन ताम्र पत्रों को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया था। जर्मनी की सरकार इन्हें वापस देने के लिए राजी हो गई है। नवंबर से दिसंबर तक इनके वापस आने की उम्मीद है।
बता दें कि चोल प्राचीन भारत का एक राजवंश था। भारत और पास के अन्य देशों में तमिल चोल शासकों ने नौ वीं शताब्दी से 13वीं शताब्दी के बीच एक अत्यंत शक्तिशाली हिन्दू साम्राज्य का निर्माण किया था। राजराजा चोल उस समय के प्रतापी राजा हुए हैं।
उस समय के ताम्र पत्र हैं। उत्तर भारत के लोगों में चोल राजवंश को लेकर फिल्म ”पोन्नियन सेल्वन” के रिलीज के बाद जिज्ञाषा बढ़ी है। 2022 में यह फिल्म तमिल के अलावा हिंदी, मलयालम, कन्नड़ और तेलुगू में रिलीज हुई थी।
चोल साम्राज्य वर्तमान भारत के तमिलनाडु, केरल, ओडिशा से लेकर मालदीव, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों तक फैला हुआ था। देश विदेश के कई इतिहासकारों ने चोल साम्राज्य के बारे में लिखा है। इस साम्राज्य की स्थापना कावेरी नदी के किनारे हुई थी।
चोल राजाओं का सिक्का कई देशों में चलता था। नौवीं से 13वीं शताब्दी के बीच चोल साम्राज्य मिलिटरी, पैसे, लिटरेचर, संस्कृति और कृषि के मामले में काफी तरक्की कर चुका था। चोल साम्राज्य के सबसे मशहूर शासक राजराजा प्रथम ने कलिंग (ओडिशा), सिलान (श्रीलंका) और मालदीव तक फैला दिया था।
राजराजा प्रथम ने ही चोल साम्राज्य की राजधानी तंजौर में मशहूर बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण कराया था। कांजीवरम में बनने वाली मशहूर सिल्क की साड़ी, कांचीपुरम का मंदिर और तमिल संस्कृति का संगम काल भी चोल साम्राज्य के समय में हुए थे। तमिल के अलावा हिंदी, मलयालम, कन्नड़ और तेलुगू में रिलीज की जाएगी।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक रहेंगे सेशेल्स के राजकीय दौरे पर

0
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने की 27 से 29 तारीख तक सेशेल्स के राजकीय दौरे पर रहेंगे। वे सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस...

डीआरडीओ के स्वदेशी नेत्रा निगरानी सिस्टम को अंतिम मंजूरी मिली

0
नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन – डी.आर.डी.ओ....

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के दान में हेराफेरी मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज

0
नई दिल्ली। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के दान में हेराफेरी के मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए आठ नामजद आरोपियों और अन्य अज्ञात...

औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी आपूर्ति से सभी क्षेत्रीय प्रतिबंध...

0
नई दिल्ली।  सरकार ने औद्योगिक और वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी की आपूर्ति पर सभी क्षेत्रीय प्रतिबंध हटा दिए हैं। आपूर्ति...

मुख्यमंत्री धामी के अनुरोध पर लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग कैप्टन अजय पंत प्रकरण में...

0
देहरादून। यूनाइटेड किंगडम में हिरासत में लिए गए उत्तराखंड निवासी कैप्टन अजय पंत के मामले में  भारतीय उच्चायोग, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों...