31.2 C
Dehradun
Tuesday, June 2, 2026


spot_img

एनडीए की सुनामी में धराशायी हुई कांग्रेस, महाराष्ट्र में मिली अब तक की सबसे बड़ी हार

नई दिल्ली: कांग्रेस ने शनिवार को महाराष्ट्र में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया और झारखंड में सरकार की सहयोगी पार्टी झामुमो के मुकाबले एक दूर की जूनियर सहयोगी बनकर रह गई। इससे विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में कांग्रेस की स्थिति और कमजोर हुई है, जबकि अन्य सहयोगी दल बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। झारखंड में’इंडिया’ गठबंधन की जीत ने कांग्रेस को कुछ सांत्वना दी है। लेकिन हरियाणा में हाल के उलटफेर के बाद महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में हार से कांग्रेस की राजनीतिक ताकत कमजोर हो सकती है। नांदेड़ लोकसभा सीट पर उप चुनाव में हार के बाद कांग्रेस की लोकसभा में सदस्यों की संख्या घटकर अब 98 रह गई है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महा विकास अघाड़ी (एवीए) के घटक के रूप में कांग्रेस ने 101 सीटों पर चुनाव लड़ा। लेकिन 16 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी। एमवीए के खराब प्रदर्शन ने भविष्य में राज्य से राज्यसभा सीटें मिलने की उम्मीदें भी खत्म कर दीं हैं। दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) शानदार जीत हासिल करते हुए संसद के उच्च सदन के लिए आगामी द्विवार्षिक चुनावों में बहुमत हासिल करने के लिए तैयार है। एमवीए की एक प्रमुख पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस विपक्षी गुट का ज्यादा वजन अपनी ओर खींचने में विफल रही और एनडीए की सुनामी के सामने धराशायी हो गई।
एमवीए के सहयोगियों के बीच कांग्रेस ने सबसे अधिक विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा। उसने 288 में से 101 सीटों पर चुनाव लड़ा। लेकिन 16 फीसदी के स्ट्राइक रेट के साथ केवल 16 सीटों पर जीत रही है या आगे चल रही है। वहीं, शरद पवार की राकांपा (एसपी) का सबसे खराब स्ट्राइक रेट (11.6 फीसदी) रहा। पार्टी 86 सीटों पर चुनाव लड़ी, जिनमें से दस सीटों पर ही बढ़त बनाए हुए या जीत गई है। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) का स्ट्राइक रेट 22 फीसदी रहा। इसने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा। अभी 21 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है या जीत गई है।
दूसरी ओर भाजपा का स्ट्राइक रेट 88.6 फीसदी रहा। यानी उसने 149 सीटों पर चुनाव लड़ा और उनमें से 132 सीटों पर जीत रही है या बढ़त बनाए हुए है। भाजपा का वोट शेयर 26.46 फीसदी रहा। उसके बाद शिवसेना को 12.47 फीसदी और राकांपा को 9.35 फीसदी वोट मिले। एमवीए में कांग्रेस को सबसे अधिक 11.89 फीसदी वोट मिले। उसके बाद राकांपा (शरद पवार) को 11.25 फीसदी और शिवसेना (यूबीटी) को 10.28 फीसदी वोट मिले।
हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हार ने कांग्रेस को कमजोर कर दिया। कांग्रेस नेतृत्व राहुल गांधी की रणनीतियों पर भी सवाल उठा सकते हैं, क्योंकि उन्होंने हाल ही में जाति जनगणना और अदाणी-अंबानी के मुद्दों पर फोकस किया है, जिनका आम जनता के बीच ज्यादा असर नहीं दिखा। हालांकि, केरल के वायनाड में लोकसभा उपचुनाव में प्रियंका गांधी की जीत से कुछ राहत मिली है। साथ ही कर्नाटक में तीन विधानसभा सीटों के उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। लेकिन ये जीत कांग्रेस समग्र हार की तुलना में कम मायने रखती है।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

नई दिल्ली में 11 जून से 13वें ब्रिक्स शहरीकरण मंच का आयोजन, भारत करेगा...

0
नई दिल्ली। भारत, 11 जून से नई दिल्ली में दो दिन के 13वें ब्रिक्स शहरीकरण मंच की मेजबानी करेगा। शहरीकरण मंच का विषय ‘जनता...

भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों का संवाद, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने पर...

0
नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने में क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने...

ईडी ने ज्ञान सागर एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की 14 अचल संपत्तियों को धन...

0
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय-ईडी ने पंजाब के रामनगर के ज्ञान सागर एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की लगभग 1,600 करोड़ रुपये की 14 अचल संपत्तियों...

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए प्रदान की191 करोड़ की...

0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा कुम्भ मेला-2027 की तैयारियों के साथ ही राज्य के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के...

विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुली

0
चमोली। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान सोमवार से पर्यटकों के दीदार के लिए खुल गई है। प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकर्स के लिए...