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Monday, September 21, 2026


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किश्तवाड़ के चिशोती कस्बे में अब वायु सेना चलाएगी रेस्क्यू ऑपरेशन; अब तक 60 मौतें और 120 घायल, लापता की तलाश जारी

किश्तवाड़: किश्तवाड़ के चिशोती कस्बे में चार जगह बादल फटने से 60 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें अधिकतर मचैल माता के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु हैं। सीआईएसएफ के दो जवान भी बलिदान हुए हैं। बड़े पैमाने पर राहत और बचाव का काम जारी है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने ट्वीट कर जानकारी दी कि वे चिशोती (किश्तवाड़) में बादल फटने की घटना वाले स्थल के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर से रवाना हुए थे, लेकिन खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के चलते हेलिकॉप्टर एक घंटे की उड़ान के बाद वापस लौट आया। इसके तुरंत बाद उन्होंने सड़क मार्ग से प्रभावित क्षेत्र की ओर रवाना होने का फैसला लिया, ताकि जल्द से जल्द राहत कार्यों की निगरानी कर सकें।
भारतीय वायु सेना जम्मू-कश्मीर में बादल फटने की घटना के पीड़ितों के लिए राहत और बचाव अभियान चलाने के लिए तैयार है। वर्तमान में जम्मू और उधमपुर में दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर और एक उन्नत हेलीकॉप्टर (एएलएच) स्टैंडबाय पर हैं। नेकां प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि मुझे लगता है कि किश्तवाड़ में 500 से ज़्यादा लोग अभी भी मलबे में दबे हुए हैं। अभी कुछ स्पष्ट पता नहीं है। मैंने वहां के लोगों से बात की है।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल ने ट्वीट कर कहा है कि, 14 अगस्त को किश्तवाड़ (जम्मू-कश्मीर) के चिशोती गांव में बादल फटने की घटना हुई। एनडीआरएफ की दो टीमें केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर खोज एवं बचाव अभियान में शामिल हुईं। तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम जारी है।
जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किश्तवाड़ जिले के एक सुदूर गांव में बादल फटने की विनाशकारी घटना के बारे में जानकारी दी है। इस घटना में 60 लोगों की मौत हो गई है और 100 से अधिक लोग घायल हो गए हैं।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, “मुझे अभी-अभी प्रधानमंत्री मोदी का फोन आया। मैंने उन्हें किश्तवाड़ की स्थिति और प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी। मेरी सरकार और बादल फटने से प्रभावित लोगों के समर्थन और केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की गई सभी सहायता के लिए आभारी है।”
बचाव कार्यों पर एनडीआरएफ अधिकारी ने कहा, “यहाँ लोगों को बचाना मुश्किल होगा क्योंकि हमारे पास अभी सिर्फ एक जेसीबी है। जब जेसीबी खुदाई करेगी, तो हम ऊपर दबे लोगों को निकाल लेंगे। अब हम यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि नीचे कितने लोग दबे हैं। हमें बताया गया है कि अभी वहां कम से कम 100-200 लोग दबे हो सकते हैं”
एक पीड़ित ने बताया कि हम वहीं थे… अचानक एक धमाके जैसी आवाज आई और बादल फटने के बाद हम वहां से निकलने लगे। लेकिन 2 मिनट के अंदर ही वहां 4 फीट मलबा आ गया। हम कुछ लोगों को बचा पाए, लेकिन कुछ लोग फंस गए। हम 11 लोग थे, हम सुरक्षित हैं, लेकिन मेरी बेटी और मेरी पत्नी मलबे में फंस गए थे, और अब उनकी हालत स्थिर है।
बचाए जाने के बाद किश्तवाड़ में अचानक आई बाढ़ के एक पीड़िता ने कहा कि जब बादल फटा, तो हम उड़ गए और मैं एक कार के नीचे फंस गई… मेरी मां एक बिजली के खंभे के नीचे फंस गई। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की और सेना और सीआरपीएफ के वाहन तुरंत पहुंच गए।

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