18.6 C
Dehradun
Friday, February 20, 2026


spot_img

उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां बोलीं- भारत बन सकता है एआई का पावरहाउस, तकनीक में बड़े निवेश की जरूरत

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेज विस्तार के साथ देश के प्रमुख उद्योग लीडर्स ने इसे लोकतांत्रिक बनाने और हर नागरिक तक पहुंचाने की बात पर जोर दिया। उनका मानना है कि भारत को एआई का पावरहाउस बनाने के लिए न सिर्फ इस तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा, बल्कि इसका अधिकतम इस्तेमाल लोगों की समस्याएं सुलझाने के लिए करना होगा।
उद्योगपति मुकेश अंबानी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र में अगले सात वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जैसे जियो ने मोबाइल डाटा सस्ता और सुलभ बनाया वैसे ही अब एआई को हर भारतीय तक पहुंचाया जाएगा। अंबानी ने कहा कि एआई विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मेलन में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमैन अंबानी ने कहा, जियो ने भारत को इंटरनेट युग से जोड़ा, अब जियो भारत को इंटेलिजेंस युग से जोड़ेगा। भारत इंटेलिजेंस किराये पर नहीं ले सकता, इसलिए हम इसकी लागत भी डाटा की तरह कम करेंगे।
अंबानी ने कहा, निवेश तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित होगा। पहला, जामनगर में गीगावॉट स्तर के एआई-रेडी डाटा सेंटर बनाएंगे। दूसरा, 10 गीगावॉट तक ग्रीन पावर का उपयोग होगा। तीसरा, जियो नेटवर्क से जुड़ा देशव्यापी एज-कंप्यूट सिस्टम बनेगा, जिससे कम समय में एआई सेवाएं मिल सकें। यह सट्टा निवेश नहीं, बल्कि देश निर्माण के लिए दीर्घकालिक पूंजी है। जियो इंटेलिजेंस के तहत बहुभाषी एआई, डाटा सुरक्षा, रोजगार सृजन व स्टार्टअप सहयोग पर जोर रहेगा।
टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि एआई आने वाले समय की सबसे बड़ी बुनियादी व्यवस्था बनने जा रही है। जैसे पहले स्टीम इंजन, बिजली और इंटरनेट ने दुनिया को बदला, उसी तरह एआई भी अर्थव्यवस्था और समाज पर गहरा असर डालेगा। एआई इंटेलिजेंस का इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जो भविष्य की दिशा तय करेगा।
चंद्रशेखरन ने जोर देते हुए कहा, एआई का फायदा देश के हर नागरिक तक पहुंचना चाहिए। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि एआई हर व्यक्ति के लिए काम करे। एआई के औजार देश के आखिरी व्यक्ति तक और दुनिया के हर इन्सान तक पहुंचाए जाएं। उनके अनुसार, यही वह मिशन है जिस पर सभी को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि एआई का लाभ समाज के हर वर्ग को मिल सके।
चंद्रशेखरन ने कहा, टाटा समूह देश का पहला बड़े स्तर का एआई अनुकूल डाटा सेंटर बना रहा है, जो नई पीढ़ी के एआई प्रशिक्षण और उपयोग के लिए तैयार होगा। ओपनएआई के साथ मिलकर 100 मेगावाट क्षमता से शुरुआत की जा रही है, जिसे आगे एक गीगावाट तक बढ़ाया जाएगा। इसका मकसद भारत को वैश्विक एआई हब के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा, टीसीएस और टाटा कम्युनिकेशन मिलकर उद्योगों के लिए एआई संचालन प्रणाली बना रहे हैं। लक्ष्य है कि एआई हर व्यक्ति और हर उद्योग तक पहुंचे। एआई से देश में समृद्धि लाई जाए।
एआई का प्रभावी उपयोग करने के लिए सिर्फ तकनीक की जानकारी काफी नहीं है, बल्कि उसकी सीमाओं को समझना भी जरूरी है। एआई से असली फायदा तभी मिलेगा, जब तकनीक और व्यापारिक जरूरतों के बीच की दूरी कम की जाएगी। वियानाई सिस्टम्स के संस्थापक और सीईओ विशाल सिक्का ने कहा कि जो लोग एआई का सही इस्तेमाल जानते हैं, वे बेहद प्रभावी साबित हो रहे हैं। मेरे एक मित्र ने नौ महीने में एक बड़ी सार्वजनिक सेवा शुरू की थी, लेकिन बाद में उसी सेवा को जनरेटिव एआई की मदद से सिर्फ चार दिनों में फिर से तैयार कर लिया। इससे उत्पादकता 250 गुना बढ़ गई। एआई पुराने और जटिल सिस्टम को बदलने के साथ ही कंपनियों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत उद्देश्यपूर्ण और जिम्मेदार एआई के जरिये नई मानव क्रांति का नेतृत्व कर सकता है। एआई के जरिये एक अरब उद्यमी सिर्फ आजीविका ही नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण जीवन भी बना सकते हैं। मौजूदा एआई में वास्तविक समझ की कमी, सुरक्षा जोखिम और अधिक ऊर्जा खपत जैसी चुनौतियां हैं। इसलिए एआई को सुरक्षित, कुशल और जिम्मेदार बनाना जरूरी है। विप्रो लिमिटेड के कार्यकारी चेयरमैन रिशद प्रेमजी ने कहा एआई एक ऐसी तकनीक है, जो पीढ़ी में एक बार आती है। आने वाले कुछ वर्षों में भारत जो फैसले करेगा, वही देश की आर्थिक दिशा और एक अरब से ज्यादा लोगों की समस्याएं सुलझाने की क्षमता तय करेंगे। भारत एआई में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। रिशद ने कहा, अब एआई पर चर्चा केवल संभावनाओं तक सीमित नहीं है। अब इसे बड़े स्तर पर लागू करने का समय है। तकनीक तभी मूल्य पैदा करती है, जब उसे जिम्मेदारी से असली समस्याओं के समाधान में लगाया जाए।
उन्होंने कहा, भारत सिर्फ एआई बनाने वाला देश नहीं, बल्कि इसे बड़े पैमाने पर लागू करने वाला देश भी बन सकता है। भारत की ताकत उसके प्रतिभाशाली युवाओं में है। आज करीब 6.5 लाख पेशेवर एआई से जुड़े काम कर रहे हैं और 2027 तक यह संख्या दोगुनी हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार 1 करोड़ युवाओं को एआई प्रशिक्षण देने की योजना पर काम कर रही है। एआई का सही और जिम्मेदार उपयोग किया गया तो भारत दुनिया में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने समिट के निष्कर्षों की घोषणा करते कहा कि एआई से जुड़ी अग्रणी कंपनियों और भारत के नवोन्मेषकों ने नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट कमिटमेंट्स पर सहमति जताई है। इसके तहत एआई का पूरी जिम्मेदारी से इस्तेमाल करते हुए रोजगार और नीतिगत मुद्दों पर प्रभाव को लेकर समझ बनाई जाएगी। साथ ही, भाषा संबंधी बाध्यताओं को भी दूर किया जाएगा ताकि यह नई तकनीक सर्वसुलभ हो।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत एआई इम्पैक्ट समिट की सफलता का प्रमाण नई दिल्ली फ्रंटियर एआई इम्पैक्ट प्रतिबद्धताएं है। इसके तहत दो मुख्य लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इनमें पहला, डाटा के माध्यम से रोजगार और आर्थिक बदलावों के लिए साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाना और दूसरा एआई प्रणालियों को बहुभाषी और सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ बनाना है। यह पहल विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के लिए एआई को समावेशी और प्रासंगिक बनाने की दिशा में भारत के नेतृत्व को दर्शाती है।
वैष्णव ने कहा, ये प्रयास मिलकर ऐसे एआई के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं जो केवल शक्तिशाली ही नहीं बल्कि समावेशी, विकासोन्मुखी और वैश्विक रूप से प्रासंगिक भी हो। वैष्णव ने जोर देकर कहा कि अब एआई सिस्टम को केवल अंग्रेजी या किसी एक संस्कृति तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे भारत की विभिन्न भाषाओं और स्थानीय संदर्भों के हिसाब से परखा और सुधारा जाएगा। अब एआई का फायदा गांव के उस व्यक्ति को भी मिलेगा जो अपनी मातृभाषा में बात करना चाहता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदाराना विस्तार और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। इंडिया एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन के दौरान सीईओ राउंडटेबल में एआई, प्रौद्योगिकी और नवाचार जगत के विभिन्न हितधारक एक साथ आए।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा, चर्चा सार्थक और दूरदर्शी थी, जिसका मुख्य उद्देश्य एआई का जिम्मेदारी भरा विस्तार करना, वैश्विक सहयोग को मजबूत करना और विकास के अवसरों को खोलना था। बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए पीएम ने कहा, मानव प्रगति और सतत विकास के लिए एआई का उपयोग करने की साझा प्रतिबद्धता को देखकर उत्साहजनक लगा।
मिस्ट्रल एआई के सीईओ व सह-संस्थापक आर्थर मेन्श ने एआई स्वायत्तता और खुले नवाचार के लिए सशक्त तर्क दिया। विकेंद्रीकरण और डिजिटल आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, एआई सशक्तीकरण का साधन होना चाहिए, प्रभुत्व का नहीं। देशों और क्षेत्रों को अपने एआई भविष्य का नियंत्रण स्वयं करना चाहिए, यह कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि डिजिटल स्वायत्तता की जरूरत है। इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने पीएम नरेंद्र मोदी की एआई को लेकर दूरदर्शी सोच की सराहना की है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण एआई को सिर्फ तकनीकी क्षेत्र तक सीमित न रखकर कृषि और पशुपालन जैसे जमीनी क्षेत्रों तक पहुंचाने का है। अब एआई का इस्तेमाल गाय भैंस की सेहत की निगरानी के लिए भी किया जाएगा।नीलेकणि ने उदाहरण देते हुए बताया कि 8 जनवरी को प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात के दौरान किसानों के लिए एआई के उपयोग पर चर्चा हुई थी। इस बातचीत में प्रधानमंत्री नया और व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा, हम एआई को सिर्फ किसानों तक ही क्यों सीमित रखें? इसे गाय और पशुओं के लिए भी क्यों न इस्तेमाल किया जाए? अगर कोई गाय बीमार है, तो वह खुद नहीं बता सकती। ऐसे में एआई से इस समस्या का समाधान कैसे किया जा सकता है? उसी दिन अमूल व अन्य सहकारिता समूहों के साथ पीएमओ में बैठक हुई और एक महीने में 11 फरवरी को इससे जुड़ी एप्लीकेशन सरला बैन लाइव हो गई। इसमें चार करोड़ पशुओं को शामिल किया गया। इस एप के जरिये पशुओं की बीमारी, दुग्ध उत्पादन से जुड़ी जानकारी हासिल की जा रही है। नीलेकणि ने कहा, यह उस विजन को दर्शाता है, जिसमें एआई के जरिये खेती और डेयरी सेक्टर को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया है। उन्होंने इसे एआई के व्यापक प्रसार की दिशा में एक अहम कदम बताया।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

ईरान पर कभी भी हो सकता है अमेरिका का हमला, ट्रंप ने फिर दी...

0
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दो टूक कहा है...

सीएए से जुड़े मामलों पर पांच मई से सुनवाई; स्टालिन के चुनाव को चुनौती...

0
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (2019) की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली आईयूएमएल समेत 200 से ज्यादा याचिकाओं...

जांच से खुलेंगे हादसे के रहस्य?: ‘जल्द जारी की जाएगी रिपोर्ट’, बारामती विमान हादसा...

0
नई दिल्ली: पुणे के बारामती में 28 जनवरी को हुए विमान हादसे ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी। इस हादसे में पूर्व...

नाबार्ड के आरआईडीएफ फंड की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित

0
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में नाबार्ड की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नाबार्ड के...

आवासीय योजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वाेच्च प्राथमिकताः डॉ. आर. राजेश कुमार

0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा निर्देशन में उत्तराखण्ड आवास एवं विकास परिषद ने शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए महत्वपूर्ण...