25.2 C
Dehradun
Monday, August 24, 2026


spot_img

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना ने दो लाख ऋण मंजूरी का आंकड़ा पार किया

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्‍नयन योजना – पीएमएफएमई ने देश भर में दो लाख से ज़्यादा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को ऋण मंज़ूर करने का अहम पड़ाव पार कर लिया है। इस योजना के तहत 20 हज़ार 300 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश हुआ है और लगभग 11 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा हुए हैं। नई दिल्ली में आज एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल जश्न मनाने का मौका है, बल्कि भारत की खाद्य प्रसंस्करण विकास यात्रा के अगले चरण के लिए एक मज़बूत आधार भी है। यह उपलब्धि दिखाती है कि योजना का विज़न देश भर में ठोस नतीजों में बदल रहा है। श्री पासवान ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सभी लाभार्थियों में लगभग 44 प्रतिशत महिला उद्यमियों की भागीदारी ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ की सच्ची भावना को दर्शाती है। यह ‘विकसित भारत’ का एक अहम आधार है।

इस अवसर पर श्री पासवान ने योजना के तहत मिलने वाली ‘सीड कैपिटल’ की सहायता का भी उल्‍लेख किया। इसके माध्‍यम से चार लाख 18 हज़ार से ज़्यादा स्वयं सहायता समूह के सदस्यों की मदद की गई है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव ए.पी. दास जोशी ने कहा कि यह उपलब्धि भारत में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए एक मज़बूत पारिस्थितिकी तंत्र के उभार को दिखाती है। उन्होंने कहा कि पीएमएफएमई उद्यम विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण के तहत वित्त, औपचारिकीकरण, तकनीक, क्षमता निर्माण और बाज़ार तक पहुँच को एक साथ लाता है। श्री जोशी ने योजना के तहत ज़िला संसाधन व्यक्तियों के नेटवर्क पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि उनका काम ज़मीनी स्तर पर ‘डिजिटल इंडिया’ और कारोबार करने की सुगमता के सफल तालमेल को दर्शाता है।

मंत्रालय में संयुक्त सचिव देवेश देवल ने कहा कि पीएमएफएमई योजना सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को शुरू से अंत तक सहायता देती है, जिसमें वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, ब्रांडिंग, विपणन और बाज़ार से जुड़ाव शामिल है। उन्होंने कहा कि यह योजना लोगों की आजीविका बदल रही है, स्थानीय मूल्‍य श्रृंखला को मज़बूत कर रही है और पूरे देश में रोज़गार के टिकाऊ अवसर पैदा कर रही है। अधिकारियों ने योजना के ‘एक ज़िला एक उत्पाद’ दृष्टिकोण और लगभग 200 उत्पादों वाले 40 कॉमन ब्रांड के लिए इसके समर्थन का भी उल्‍लेख किया। यह पहल पूरे देश में मखाना, मोटे अनाज, मसालों और जीआई-टैग वाले उत्पादों के लिए स्थानीय मूल्‍य श्रृंखला बना रही है।

कार्यक्रम में योजना की उपलब्धियों को उजागर करने वाले मुख्य प्रकाशन जारी किए गए और उद्यमियों ने अपनी सफलता की कहानियाँ साझा कीं। इस कार्यक्रम में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, सहयोगी मंत्रालय, बैंकिंग संस्थान, विकास भागीदार, उद्यमी, स्वयं सहायता समूह और किसान उत्पादक संगठन शामिल हुए।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

ब्रिक्स खेल मंत्रियों की बैठक में संयुक्त घोषणा पत्र सर्वसम्मति से स्वीकार

0
नई दिल्ली।  ब्रिक्‍स खेल मंत्रियों की बैठक का समापन आज आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में हो गया। इसमें ब्रिक्‍स खेल संयुक्‍त घोषणा पत्र सर्वसम्‍मति...

नाथूला दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा संपन्न, 464 श्रद्धालु हुए शामिल

0
नई दिल्ली। सिक्क्मि के नाथूला दर्रे के रास्‍ते से होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा आज संपन्‍न हो गई। इसके माध्‍यम से 464 तीर्थ यात्रियों...

प्रधानमंत्री मोदी ने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र से नवाचार की वैश्विक छवि बनाने का आग्रह...

0
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स ने सरकार में अपना विश्वास व्यक्त किया है। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र...

आईसीएआर महानिदेशक ने मृदा डेटाबेस को कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया

0
नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण और भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो द्वारा...

गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में भाग लेंगे

0
नई दिल्ली।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कल नई दिल्ली में आयोजित होने वाले नौवें राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में भाग लेंगे। दो दिवसीय यह...