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Monday, August 3, 2026


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आठवां वेतन आयोग: ₹54000 न्यूनतम वेतन और पुरानी पेंशन बहाली पर ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के एक करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनधारियों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। लंबे समय से आठवें वेतन आयोग की राह देख रहे कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और अन्य मांगों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। नई दिल्ली में नेशनल काउंसिल जेसीएम की ड्राफ्ट कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो चुकी है, जिसका मुख्य उद्देश्य वेतन संरचना, भत्ते और पेंशन से जुड़े अहम मुद्दों पर एक साझा ज्ञापन (कॉमन मेमोरेंडम) तैयार करना है।
नई दिल्ली के जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में आठवें वेतन आयोग को हाल ही में कार्यालय उपलब्ध करा दिया गया है, जिसे आयोग की औपचारिक कार्यवाही को गति मिलने का एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। इस वेतन आयोग की अध्यक्षता रंजना देसाई कर रही हैं। जेसीएम की ड्राफ्टिंग कमेटी करीब एक सप्ताह तक विभिन्न कर्मचारी संगठनों से सुझाव जुटाकर व्यापक विचार-विमर्श करेगी। इस कवायद का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अहम मुद्दा छूट न जाए और करीब 1.2 करोड़ कर्मचारियों व पेंशनधारियों की ओर से आयोग के समक्ष एक मजबूत तथा संगठित प्रस्ताव रखा जा सके।
वेतन ढांचे को संतुलित बनाने के लिए कर्मचारी यूनियनों की ओर से कई बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा जा रहा है। इस साझा ज्ञापन में शामिल की जा रही मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय करने में फिटमेंट फैक्टर की अहम भूमिका होती है। कर्मचारी लंबे समय से 3.25 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही, वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखते हुए न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 54,000 रुपये तय करने का भी प्रस्ताव है।
सालाना इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि): मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारियों को प्रतिवर्ष तीन प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी (इंक्रीमेंट) मिलती है। केंद्रीय कर्मचारी महासंघ का सुझाव है कि इसे बढ़ाकर सात प्रतिशत किया जाए, या फिर कर्मचारियों को साल में दो बार इंक्रीमेंट का वित्तीय लाभ दिया जाए। पुरानी पेंशन योजना की बहाली: नई पेंशन व्यवस्था को हटाकर, पुरानी पेंशन योजना को वापस लागू करने की मांग इस ड्राफ्टिंग कमेटी की चर्चाओं का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मेडिकल और लीव एन्कैशमेंट में भारी इजाफा: जिन क्षेत्रों में केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को मौजूदा 1,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 20,000 रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव है, क्योंकि इलाज के खर्च के मुकाबले मौजूदा रकम बहुत कम है। इसके अतिरिक्त, लंबी सेवा वाले कर्मचारियों को लाभ देने के लिए लीव एन्कैशमेंट (छुट्टियों के बदले नकद भुगतान) की सीमा को 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन करने की मांग उठाई गई है।
कर्मचारियों और यूनियनों का स्पष्ट मानना है कि यदि इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है, तो बढ़ती महंगाई से निपटने में उन्हें न केवल बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि उनका वेतन ढांचा भी अधिक न्यायसंगत बन सकेगा। ड्राफ्टिंग कमेटी द्वारा अंतिम रूप दिए जाने के बाद, यह विस्तृत संयुक्त ज्ञापन 8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा जाएगा। इसके बाद लाखों कर्मचारियों की उम्मीदें पूरी तरह से केंद्र सरकार पर टिक जाएंगी कि वह इन बहुप्रतीक्षित सिफारिशों पर विचार कर आधिकारिक रूप से नई घोषणाएं कब करती है।

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