नई दिल्ली। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को भरोसा जताया कि भारत 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात के लक्ष्य को आसानी से पार कर लेगा। उन्होंने कहा कि देश पहले ही इस क्षेत्र में तेज विकास की राह पर है और वैश्विक मांग इसमें नई गति दे रही है। ‘एएनआई राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन 2.0’ में सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष भारत का रक्षा निर्यात करीब 38,000 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल में 61 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में चल रहे संघर्षों के कारण पारंपरिक हथियारों- जैसे गोला-बारूद और तोप के गोलों- की मांग तेजी से बढ़ी है।
एशिया और अफ्रीका के देशों में भारतीय रक्षा प्रणालियों को लेकर खासा रुचि दिख रही है, जबकि विकसित देशों में यह अपेक्षाकृत कम है। सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि रक्षा निर्यात में अब सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका बढ़ी है, जबकि पहले निजी क्षेत्र इसमें अग्रणी था। इसी के साथ उन्होंने संकेत दिया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत को अपनी मिसाइल रणनीति पर भी पुनर्विचार करना होगा। पश्चिम एशिया के संघर्ष और पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य तैयारी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पारंपरिक मिसाइल क्षमताओं का महत्व अब और स्पष्ट हो रहा है। उन्होंने कहा कि दूर से मार करने वाले हथियार, बहुस्तरीय वायु रक्षा और गतिशील राडार-तोपखाना आज के युद्ध में निर्णायक बनते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले इन क्षमताओं को मुख्यत: रणनीतिक उपयोग तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा बदल रही है। हमें भी उसी अनुसार अपनी तैयारी करनी होगी। रक्षा सचिव ने कहा कि सरकार उत्पादन क्षमता बढ़ाने और प्रक्रियागत देरी कम करने पर जोर दे रही है।
इसके लिए निजी क्षेत्र सहित व्यापक औद्योगिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि मिसाइल और अन्य रक्षा प्रणालियों का उत्पादन तेज हो सके।उन्होंने स्पष्ट किया कि हालिया वैश्विक संघर्षों से भारत के रक्षा आधुनिकीकरण की दिशा तय हो रही है। इसमें मजबूत वायु रक्षा प्रणाली, ड्रोन क्षमता, पर्याप्त गोला-बारूद भंडार और त्वरित खरीद तंत्र को प्राथमिकता दी जा रही है।
‘2029 तक 50000 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा डिफेंस एक्सपोर्ट’, बोले रक्षा सचिव राजेश सिंह
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