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Tuesday, June 23, 2026


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पीएम मोदी की अध्यक्षता में नए मुख्य चुनाव आयुक्त पर मंथन; कांग्रेस ने कहा-SC के फैसले तक रोकें चयन

नई दिल्ली: देश के नए मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर आज पीएम मोदी की अध्यक्षता में बैठक हुई है। जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी शामिल हुए हैं। बता दें कि, मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार का कार्यकाल कल (18 फरवरी) को खत्म हो रहा है। वहीं उम्मीद की जा रही है कि सीईसी राजीव कुमार के बाद सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अगला मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया जा सकता है।
अब तक सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त को ही मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदोन्नत किया जाता था। हालांकि, पिछले साल मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्तियों पर एक नया कानून लागू हुआ। इसके तहत एक खोज समिति ने इन पदों पर नियुक्ति के लिए पांच सचिव स्तर के अधिकारियों के नामों को शॉर्ट लिस्ट किया था, ताकि प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली समिति उन पर विचार कर सके। पीएम, लोकसभा में नेता विपक्ष और पीएम की तरफ से नामित एक कैबिनेट मंत्री एक नाम को मंजूरी देते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करेंगी।
वहीं इसे लेकर कांग्रेस की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई, जिसे कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और अजय माकन ने संबोधित किया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि, आज चीफ इलेक्शन कमिश्नर के चुनाव से जुड़ी बैठक हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 19 फरवरी को इस विषय में सुनवाई होगी और फैसला सुनाया जाएगा कि कमेटी का संविधान किस तरीके का होना चाहिए। ऐसे में आज की बैठक को स्थगित करना चाहिए था। कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह चुनाव आयोग पर नियंत्रण चाहती है, न कि उसकी विश्वसनीयता को बनाए रखना चाहती है।
इस दौरान कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए 2023 में एक एक्ट आया- मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम इसके अनुसार- प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और नेता विपक्ष की समिति मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन करती है, लेकिन उसमें बहुत सारी संवैधानिक और कानूनी समस्याएं हैं। इन्हीं समस्याओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सामने बात रखी गई और सुप्रीम कोर्ट ने 2 मार्च 2023 को एक फैसला दिया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र और उसकी निष्पक्षता के लिए सीईसी और ईसी की चयन समिति में प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआईI) और नेता विपक्ष हों। लेकिन इस फैसले की आत्मा और उद्देश्य को बिना समझे, जल्दबाजी में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम लाया गया। इस नए कानून में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के ठीक विपरीत काम किया गया, जिसमें पूरी तरह से कार्यपालिका मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) का चयन कर रही है।

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