24.9 C
Dehradun
Monday, May 4, 2026


spot_img

नवरात्रि के सातवें दिन होती है देवी कालरात्रि की पूजा,जाने विधि और महत्व

दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, वहीं यह पर्व दुर्गा पूजा का पर्व भी कहलाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार मंगलवार,12 अक्टूबर 2021 को आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। ऐसे में यह दिन नवरात्रि का सातवां दिन होने के चलते इस दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है।

मान्यता के अनुसार मां कालरात्रि की पूजा से भक्त के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। वहीं मां कालरात्रि को शनि की संचालक देवी भी माना जाता है, ऐसे में इनकी पूजा से शनिदेव भी शांत होते हैं। दरअसल शारदीय नवरात्र के इस पर्व को दुर्गा पूजा भी कहा जाता है, जहां एक ओर नवरात्रि केवल 9 दिन की होती हैं, वहीं ये दुर्गा पूजा पूरे 10 दिनों तक मनाया जाने वाला त्‍यौहार है और इसका हर एक दिन का अपना एक अलग महत्‍व है।

दुर्गा पूजा में आखिरी के चार दिन बेहद पवित्र माने जाते हैं, जो कालरात्रि से शुरु होकर दशमी तक जाते हैं। दरअसल दुर्गा पूजा के तहत नवरात्रि के सातवें दिन से महा पूजा की शुरुआत होती है, इसे महा सप्‍तमी के नाम से जाना जाता है ।

मां कालरात्रि का स्वरूप

जानकारों के अनुसार नवरात्रि का 7वें दिन माता को खुश करने के लिए कई तांत्रिक उपाय भी किए जाते हैं। मां कालरात्रि मां दुर्गा का ही 7वां रुप हैं, जो अत्यंत भयंकर हैं। इनके शरीर का रंग काला होने के साथ ही मां कालरात्रि के गले में नरमुंड की माला भी है। कालरात्रि के तीन नेत्र हैं और उनके केश खुले हैं। यह गर्दभ पर सवार हैं। देवी मां के इस रूप के चार हाथ हैं, जिनमें एक हाथ में कटार और एक हाथ में लोहे का कांटा है। वहीं हिंदू धर्म की पौराणिक कथा के मुताबिक असुरों के राजा रक्तबीज का संहार करने के लिए ही दुर्गा मां ने मां कालरात्रि का रूप लिया था।

मां कालरात्रि की पूजा का महत्व

मान्यता के अनुसार मां कालरात्रि की पूजा करने से जहां जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा होती है, वहीं इनके प्रभाव के चलते कुंडली में शनि के कुप्रभाव का भी असर नहीं होता है। शत्रु और दुष्टों का संहार करने के साथ ही मां कालरात्रि की पूजा से तनाव, अज्ञात भय और बुरी शक्तियां दूर रहती हैं।

मां कालरात्रि की पूजा विधि

आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी की सुबह स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत होने के बाद पूजा आरंभ करनी चाहिए। इनकी पूजा में नियम और अनुशासन का विशेष पालन करना आवश्यक है। मां कालरात्रि की पूजा भी मुख्य रूप से वैसे ही की जाती है जिस प्रकार से अन्य देवियों की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि की पूजा में मिष्ठान, पंच मेवा, पांच प्रकार के फल,अक्षत, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ नैवेद्य आदि का अर्पण किया जाता है। इस दिन गुड़ का विशेष महत्व माना जाता है, लाल रंग मां कालरात्रि को अति प्रिय माना गया है। वहीं सप्तमी की रात्रि में देवी की पूजा विशेष विधान से की जाती है। इस दिन कहीं कहीं तांत्रिक विधि से पूजा की जाती है। सप्तमी की रात्रि को ‘सिद्धियों’ की रात भी कहा जाता है। शास्त्रों में वर्णित पूजा विधान के अनुसार पहले कलश की पूजा करनी चाहिए।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

‘पैडमैन’ अरुणाचलम मुरुगनाथम नोबेल शांति पुरस्कार 2026 के लिए नामित, बदल दी महिलाओं की...

0
कोयंबटूर: तमिलनाडु के सामाजिक उद्यमी अरुणाचलम मुरुगनाथम, जिन्हें 'पैडमैन' के नाम से जाना जाता है, को 2026 के नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित...

भारत आ रहे एक और एल.पी.जी. टैंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार किया

0
नई दिल्ली। भारत आ रहे मार्शल आइलैंड्स ध्वज के एल.पी.जी. टैंकर, एमटी सर्व शक्ति, ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर लिया। इसमें 46...

इंफाल एयरपोर्ट के पास हुआ बम विस्फोट, जातीय हिंसा की तीसरी बरसी पर घटी...

0
नई दिल्ली। मणिपुर के इंफाल वेस्ट जिले में रविवार को बम विस्फोट हुआ है। यह धमाका राज्य में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच...

गैलेक्सी-आई ने स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से दुनिया का पहला ऑप्टोसार उपग्रह, मिशन...

0
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप गैलेक्सी ने कैलिफोर्निया से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से विश्‍व के पहले ऑप्टोसार उपग्रह, मिशन दृष्टि, का प्रक्षेपण किया।...

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शुरू हुआ सनातन संस्कृति का स्वर्णिम कालः मुख्यमंत्री धामी

0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून जनपद के सेलाकुई स्थित आद्यशक्ति श्री माता वैष्णो देवी धाम सेवा समिति द्वारा आयोजित भव्य मां भगवती...