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Friday, May 15, 2026


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भारत-बांग्लादेश सीमा पर हाई अलर्ट, त्रिपुरा और मिजोरम पहुंचे पूर्वी कमान प्रमुख

नई दिल्ली। पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता और बिगड़ते आंतरिक हालात के बीच भारतीय सेना की पूर्वी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी त्रिपुरा और मिजोरम पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सीमा की अग्रिम मोर्चों का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। हालांकि सेना के सूत्र इसे रूटीन दौरा कह रहे हैं लेकिन रक्षा विशेषज्ञ भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे संवेदनशील राज्य में सेना प्रमुख की यात्रा को सुरक्षा तैयारियों और रणनीतिक सतर्कता के स्पष्ट संकेत के रूप में देख रहे हैं।
बांग्लादेश सीमा से सटे पांचों राज्यों की एक तरह से सीमाएं लगभग सील हैं। सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। सूत्रों के मुताबिक, सीमा पर किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए सेना, बीएसएफ और खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत किया गया है। सेना प्रमुख ने सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवानों की तैयारियों की सराहना करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए चौकसी, गश्त और एजेंसियों के बीच समन्वय में कोई कमी न रहे।
पूर्वी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ स्पीयर कोर के तहत मिजोरम के परवा सेक्टर में असम राइफल्स और बीएसएफ के कंपनी ऑपरेटिंग बेस का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सीमा पर तैनात बलों की परिचालन तैयारियों, गश्त व्यवस्था और खुफिया इनपुट की समीक्षा की। सेना प्रमुख ने जवानों की सतर्कता और अनुशासन की सराहना करते हुए बदलते क्षेत्रीय हालात के मद्देनजर चौकसी और आपसी समन्वय और मजबूत करने के निर्देश दिए।
भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो पांच राज्यों से होकर गुजरती है। पश्चिम बंगाल के साथ सबसे लंबी करीब 2,217 किलोमीटर सीमा लगती है। इसके बाद त्रिपुरा से 856 किलोमीटर, मेघालय से 443 किलोमीटर, असम से 263 किलोमीटर और मिजोरम से लगभग 318 किलोमीटर सीमा साझा होती है। मिजोरम की सीमा पहाड़ी और घने जंगलों से होकर गुजरती है, जिससे निगरानी और गश्त एक बड़ी चुनौती बनी रहती है।
मिजोरम की सीमा बांग्लादेश के चटगांव हिल क्षेत्र से लगती है। इस क्षेत्र के खागड़ाछड़ी, रांगामाटी और बंदरबन जिले सीधे मिजोरम से सटे हैं। भौगोलिक रूप से दुर्गम होने के कारण यह इलाका पहले भी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का विषय रहा है।

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