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Thursday, February 19, 2026


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गृह मंत्री शाह की दो टूक- चुनाव आयोग के SIR में हस्तक्षेप अस्वीकार्य, घुसपैठ पर राजनीति न करें लोग

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान चुनाव आयोग के एसआईआर और घुसपैठ के मुद्दे पर अहम बयान दिए। शाह ने दूसरे देश से आने वाले लोगों की संख्या पर अंकुश लगाने को जरूरी बताते हुए कहा कि अगर बिना किसी पाबंदी के लोगों को आने दिया गया तो देश धर्मशाला बनकर रह जाएगा।
एक कार्यक्रम में शाह ने कहा, घुसपैठ को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने घुसपैठियों को राजनीतिक संरक्षण नहीं देने की बात पर भी जोर दिया। अमित शाह ने मतदाता सूची शुद्धिकरण के लिए निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया- विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का जिक्र करते हुए कहा, चुनाव आयोग की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, एसआईआर चुनाव आयोग की सांविधानिक जिम्मेदारी है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, सरकार घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट यानी निर्वासित करने की प्रक्रिया का पालन करेगी। उन्होंने कहा, मतदान का अधिकार केवल उन लोगों को मिलना चाहिए जो इस देश के नागरिक हैं। शाह ने एक हिंदी समाचार पत्र के कार्यक्रम में कहा कि 1950 के दशक से ही भाजपा ने घुसपैठियों से निपटने के लिए पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो की नीति अपनाई है। हम घुसपैठियों की पहचान भी करेंगे, मतदाता सूची से भी हटाएंगे और देश से भी उन्हें वापस भेजेंगे। इस अभियान को लेकर विवाद भी उठेंगे लेकिन विवाद से बचने और देश को बचाने, लोकतंत्र को बचाने, देश की संस्कृति को बचाने, यदि इनमें से किसी एक को चुनना पड़े तो भाजपा हमेशा देश को चुनेगी।
उन्होंने कहा कि घुसपैठ और चुनाव आयोग के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को सियासी चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यह राष्ट्रीय मुद्दा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में शामिल घुसपैठिये देश की राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बन जाते हैं, यह संविधान की भावना को दूषित करने जैसा है। वोट देने का अधिकार केवल उन लोगों को मिलना चाहिए, जो इस देश के नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव तब तक नहीं हो सकते जब तक मतदाता सूची मतदाताओं की परिभाषा के अनुसार न हो यानी भारतीय नागरिक होना और योग्य आयु प्राप्त करना। मैं देश के नागरिकों से पूछना चाहता हूं कि देश के प्रधानमंत्री कौन होंगे, मुख्यमंत्री कौन होंगे, इसका फैसला देश के नागरिकों के अलावा किसी और को करने का अधिकार होना चाहिए क्या?
शाह ने कहा कि कांग्रेस एसआईआर के मुद्दे पर इन्कार की मुद्रा में चली गई है। यह कवायद कांग्रेस की सरकार के दौरान भी हुई थी। विपक्ष इसलिए विरोध रहा है क्योंकि उनका वोट बैंक कट रहा है। मतदाता सूची को स्वच्छ करना चुनाव आयोग की सांविधानिक जिम्मेदारी है। यदि आपको कोई दिक्कत है तो आप अदालत जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा आएगा जब विपक्ष को भी नहीं बख्शा जाएगा। घुसपैठिये और शरणार्थी के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए शाह ने कहा कि शरणार्थी अपने धर्म को बचाने के लिए भारत आता है, जबकि घुसपैठिया धार्मिक उत्पीड़न के कारण नहीं बल्कि आर्थिक और अन्य कारणों से अवैध रूप से सीमा पार करता है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद हुई जनगणनाओं में 1951 में हिंदू 84%, मुस्लिम 9.8%, 1971 में हिंदू 82%, मुस्लिम 11%, 1991 में हिंदू 81%, मुस्लिम 12.21% और 2011 में हिंदू 79%, मुस्लिम 14.2% थे। भारत में मुस्लिम आबादी 24.6% हो गई। यह वृद्धि घुसपैठ के कारण हुई। असम में 2011 की जनगणना में मुस्लिमों की आबादी की दशकीय वृद्धि दर 29.6% थी। यह घुसपैठ के बिना संभव नहीं है। पश्चिम बंगाल के कई जिलों में यह वृद्धि दर 40% है, और कई सीमावर्ती क्षेत्रों में 70% तक पहुंच गई है। यह स्पष्ट प्रमाण है कि अतीत में घुसपैठ हुई है। शाह ने कहा कि 1951 से लेकर 2014 तक जो गलतियां हुई थीं, उनका एक प्रकार से तर्पण करने का काम पीएम मोदी ने किया था। नेहरू ने शरणार्थियों को नागरिकता देने का वादा किया था लेकिन वह इससे मुकर गए। आजादी के बाद नेताओं ने पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों से वादा किया था कि अभी दंगे हो रहे हैं, इसलिए अभी मत आओ। बाद में हम आपको नागरिकता देंगे। यह नेहरू-लियाकत समझौते का हिस्सा था लेकिन कांग्रेस की सरकारों ने उन्हें नागरिकता नहीं दी, उन्हें शरणार्थी बना दिया। पूर्ण बहुमत की सरकार बनने पर पीएम मोदी उन्हें नागरिकता दी, उन्होंने कहा कि झारखंड में जनजातीय समुदाय की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। इसका कारण बांग्लादेश से घुसपैठ है। देश का विभाजन धर्म के नाम पर करना बहुत बड़ी गलती थी। कांग्रेस ने भारत माता की भुजाओं को काटकर अंग्रेजों की साजिश को सफल बना दिया
बता दें कि निर्वाचन आयोग ने हाल ही में बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी की है। अब आयोग पूरे देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तैयारी कर रहा है। आयोग ने कहा है कि पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में चरणबद्ध तरीके से एसआईआर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि, पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कुछ अन्य विपक्षी राजनेताओं ने भी निर्वाचन आयोग के इस फैसले का मुखरता से विरोध किया है।

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