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Thursday, January 22, 2026


भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच हुए अमेरिका-चीन टैरिफ समझौते से हमारे देश को कितना फायदा?

मुंबई: चीन और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी कर बताया कि, वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए उनके द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापार संबंधों के महत्व देखते हुए दोनों देशों के बीच टैरिफ पर सहमति बनी है। अमेरिका और चीन इस बात पर सहमत हुए है कि वे 90 दिनों के लिए अपने पहले से घोषित पारस्परिक शुल्क और जवाबी शुल्क वापस ले लेंगे। इस बीच चीन और अमेरिकी वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाएगा और अमेरिका चीनी वस्तुओं पर लगभग 30 प्रतिशत कर लगाएगा।
बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर होने वाले व्यापार में जो व्यावधान टैरिफ की वजह से पड़ रहे थे, उसके लिए यह घोषणा अच्छी है। भारत पर भी इसका असर होगा क्योंकि चीन एक बार फिर अमेरिका में अपनी वस्तुओं का व्यापार कर सकेगा और इससे भारत में डंपिंग की समस्या से निजात मिलेगी। इससे भारतीय बाजार अपनी तरह से आगे बढ़ते रहेंगे।
बाजार के वरिष्ठ विशेषज्ञ किशोर ओस्तवाल का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच बनी सहमति विश्व व्यापार के लिए अच्छी खबर है। वैश्विक स्तर पर होने वाले व्यापार में जो व्यवधान टैरिफ की वजह से पड़ रहे थे, उसके लिए यह घोषणा अच्छी है। भारत पर भी इसका असर होगा क्योंकि चीन एक बार फिर अमेरिका में अपनी वस्तुओं का व्यापार कर सकेगा और भारत में डंपिंग की समस्या नहीं होगी। टैरिफ में कमी के बाद भी भारत के बाजार में बढ़त दिख रही है। अमेरिका के लिए भारतीय बाजार काफी महत्वपूर्ण है और वह भारत को प्राथमिकता देता है। इसलिए भारतीय बाजार अपनी तरह से आगे बढ़ते रहेंगे।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइस रिसर्च के प्रमुख देवर्ष वकील कहते हैं दोनों देशों के बीच पारस्परिक टैरिफ घोषणा के बाद, बाजारों में हुए नुकसान की भरपाई होने संभावना है। अमेरिका-चीन व्यापार तनाव कम होने के संकेतों ने निवेशकों की घबराहट को कम कर दिया है। भारत के बाजारों और अर्थव्यवस्था ने पहले से ही लचीलापन दिखाया है, जो लगातार बाहरी उथल-पुथल के बाद स्थिर रही। भविष्य में वैश्विक स्तर पर और घरेलू स्तर पर कारोबार अच्छा होने के संकेत है।
इक्किरस सिक्योरिटीज की अर्थशास्त्री अनिता रंगन कहती हैं अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौता 2 अप्रैल 2025 से टैरिफ-व्यापार असहमति पर अनिश्चितता के स्तर को कम करने के लिए कुल मिलाकर सकारात्मक है। हालांकि चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है, इसलिए इस समझौते से विश्व को कई गुना लाभ होगा।

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