नई दिल्ली : स्वदेशी रक्षा उद्योग को बड़ा बूस्ट देते हुए, भारत और इंडोनेशिया ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के सौदे पर हस्ताक्षर करने के करीब पहुंच गए हैं। रक्षा सूत्रों ने बताया कि बातचीत में लगभग सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए केवल रूसी पक्ष की स्वीकृति की आवश्यकता है। भारत ने यह मिसाइल रूस के साथ मिलकर बनाया है और मिसाइल बनाने वाली कंपनी में रूस की भी हिस्सेदारी है।
भारत और इंडोनेशिया लंबे समय से इस सौदे पर चर्चा कर रहे हैं। इस साल जनवरी में इंडानेशिया के शीर्ष राजनयिकों के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की नई दिल्ली यात्रा के दौरान इस पर चर्चा हुई थी। भारत फिलीपीन को ये मिसाइलें बेच चुका है और अब इस अनूठी हथियार प्रणाली के लिए बाजार का विस्तार करना चाहता है। इस मिसाइल ने मई में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान अपनी क्षमता साबित की है।
हाल ही में सीडीएस अनिल चौहान सहित वरिष्ठ भारतीय सैन्य नेताओं ने इंडोनेशिया का दौरा किया। सीडीएस की इंडोनेशिया यात्रा से भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा संबंध और प्रगाढ़ हुए हैं। इसी साल जनवरी में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भारत की राजकीय यात्रा ने भी भारतीय और इंडोनेशियाई सेना के बीच घनिष्ठ सहयोग का मार्ग प्रशस्त किया। भारत ने कुछ साल पहले फिलीपीन के साथ लगभग 3,500 करोड़ रुपये का एक समझौता किया था और उसे मिसाइलें और आवश्यक प्रणालियां बेचीं हैं।
भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में काफी गहरा हुआ है। साल 2018 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था।अप्रैल 2024 में जकार्ता में आयोजित भारत-इंडोनेशिया रक्षा उद्योग प्रदर्शनी में भारत की 30 से अधिक रक्षा कंपनियों ने भाग लिया था। इस अवसर पर दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन और आपूर्ति शृंखला सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। दोनों देशों की नौसेनाएं नियमित रूप से समन्वित गश्ती व संयुक्त अभ्यास करती हैं, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूती मिली है। दोनों देशों के बीच रक्षा उद्योग, प्रशिक्षण व प्रौद्योगिकी सहयोग पर अहम समझौते भी हुए हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति व स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
ब्रह्मोस एक सार्वभौमिक लंबी दूरी की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली है, जिसे जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किया जा सकता है। ब्रह्मोस को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के नैटिक पॉलीमर्स एंड ऑर्गनिक्स (एनपीओएम) के संयुक्त उद्यम के तहत विकसित किया गया है। इस प्रणाली को एंटी-शिप और लैंड-अटैक भूमिकाओं के लिए दो वैरिएंट के साथ डिजाइन किया गया है। ब्रह्मोस हथियार प्रणाली को भारतीय नौसेना के साथ-साथ भारतीय सेना में भी शामिल किया गया है।
इंडोनेशिया को ब्रह्मोस बेचने के करीब पहुंचा भारत, जल्द हो सकते हैं सौदे पर हस्ताक्षर
Latest Articles
भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति की नई दिल्ली में हुई पहली बैठक भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा...
नई दिल्ली। भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति- जेडीसी की पहली बैठक आज नई दिल्ली में हुई। बैठक के दौरान, दोनों देशों ने प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास,...
नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या बढ़कर 547; सीमा के दोनों तरफ...
नई दिल्ली। नेपाल और तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ से मृतकों की संख्या बढ़कर 547 हो गई है। 1,545 लोग अब भी लापता हैं। राहत...
भारत ने नेपाल में बचाव और राहत कार्यों के लिए 47 टन से ज़्यादा...
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल में बुधवार को अचानक बाढ़ की त्रासदी के बाद 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो...
लोक भवन में उल्लास और आत्मीयता के साथ मनाया गया रक्षाबंधन पर्व
देहरादून: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आज लोक भवन में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि)...
मुख्यमंत्री धामी की बड़ी घोषणाः अब 60 वर्ष की आयु से महिलाओं को रोडवेज...
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में महिलाओं की सुविधा, सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त हाईटेक...
















