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Wednesday, June 24, 2026


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सीमा विवाद पर बोले जयशंकर, PM मोदी ने जिनपिंग के साथ बैठक के दौरान मतभेदों को निपटाने पर दिया जोर

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बात लोकसभा में भारत-चीन सीमा विवाद पर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने रूस के कजान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक में भारत और चीन के बीच मतभेदों और विवादों को सही तरीके से संभालने और उन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को बाधित करने से रोकने के महत्व पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच बातचीत 23 अक्तूबर को कज़ान में 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर हुई। यह बैठक उस समय हुई जब भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर डेमचोक और डेपसांग के विवादित क्षेत्रों में सैनिकों को हटाने के लिए समझौता किया था। यह समझौता इन क्षेत्रों में चार साल से चल रहे तनाव को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने 21 अक्तूबर को कहा था कि चीन इस प्रगति की सराहना करता है और इन समझौतों को लागू करने के लिए भारत के साथ काम करना जारी रखेगा। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने सीमा क्षेत्रों के मुद्दों के समाधान में हुई प्रगति की सराहना की। जयशंकर ने यह भी बताया कि सरकार एलएसी पर किसी भी अतिक्रमण के मुद्दे को चीनी पक्ष के साथ निर्धारित तंत्रों, जैसे बॉर्डर पर्सनल मीटिंग, फ्लैग मीटिंग, और भारत-चीन सीमा मामलों पर विचार-विमर्श और समन्वय के कार्य तंत्र, के माध्यम से उठाती है।
उन्होंने कहा, कज़ान में प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बैठक में सहमति बनी कि विदेश मंत्री और अन्य अधिकारियों के स्तर पर प्रासंगिक संवाद तंत्र का उपयोग द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने और पुनर्निर्मित करने के लिए किया जाएगा। विदेश मंत्री जयशंकर ने 18 नवंबर को ब्राजील में जी20 शिखर सम्मेलन के मौके पर चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ हुई अपनी बैठक का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, इस बैठक में भारत-चीन संबंधों के अगले कदमों पर चर्चा हुई। यह तय हुआ कि जल्द ही विशेष प्रतिनिधियों और विदेश सचिव-उपमंत्री स्तर की बैठक होगी। उन्होंने यह भी बताया कि चर्चा के तहत कदमों में कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, सीमा पार नदियों पर डेटा साझा करना, भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें, और मीडिया के आदान-प्रदान शामिल थे।

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