24.3 C
Dehradun
Wednesday, June 3, 2026


spot_img

नवरात्रि का दूसरे दिन होती है मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा

आदि शक्ति मां दुर्गा का द्वितीय रूप है श्री बह्मचारिणी। मां दुर्गा अपने इस रूप में पूर्ण रूप से शांत हैं साथ ही निमग्न होकर तप में लीन हैं। कठोर तप के कारण मां के मुख पर तेज विराजमान है जो तीनों लोकों को प्रकाशमान कर रहा है।

ब्रह्म का अर्थ है, तपस्या, तप का आचरण करने वाली भगवती, जिस कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया। इनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमण्डल है। कुंडलिनी जागरण के साधक इस दिन स्वाधिष्ठान चक्र को जाग्रत करने की साधना करते हैं।

माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं। इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया। इस वरदान के फलस्वरूप ही देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्नी बनी। ब्रह्मचारिणी देवी की कथा का सार ये है कि जीवन के कठिन से कठिन समय में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

केंद्र सरकार ने लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का अध्यक्ष नियुक्त किया

0
नई दिल्ली। भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्‍ठ अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड-सी.बी.एस.ई. का नया अध्‍यक्ष नियुक्‍त किया गया है। श्री...

सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक की जगह पीपीआई प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया

0
नई दिल्ली। सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक-डब्ल्यूपीआई को धीरे-धीरे समाप्त करने और उसकी जगह एक व्यापक उत्पादक मूल्य सूचकांक-पीपीआई प्रणाली लागू करने का निर्णय...

अनुकंपा नियुक्ति में विवाहित बेटियों को भी समान अधिकार: सर्वोच्च न्यायालय

0
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्‍यायालय ने कहा है कि विवाहित बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता है। न्‍यायालय ने कहा कि...

सरकार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए नामांकन आमंत्रित किए

0
नई दिल्ली।  सरकार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2026 के लिए नामांकन आमंत्रित किए हैं। नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। यह...

सदियों पुराने व्यापारिक मार्ग लिपुलेख दर्रे से फिर होगा व्यापार शुरू

0
देहरादून। हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच स्थित लिपुलेख दर्रा केवल एक व्यापारिक मार्ग नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और सभ्यताओं के संवाद का जीवंत...