नई दिल्ली: देश में लोकसभा और राज्यों के चुनाव एक ही समय कराए जाने का विरोध करने वालों का कहना है कि इससे संघीय व्यवस्था और लोकतंत्र प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन पूर्व सीजेआई गवई और विधि आयोग का मानना है कि ऐसा नहीं होगा, क्योंकि चुनाव की मूल प्रक्रिया और अधिकार नहीं बदलेंगे- सिर्फ चुनाव की टाइमिंग बदलेगी।
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) के सामने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ (एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव) कराने का प्रस्ताव संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता। उन्होंने समझाया कि संविधान का मूल ढांचा मुख्य रूप से संघीय व्यवस्था और लोकतांत्रिक शासन जैसे सिद्धांतों पर आधारित है। उनके अनुसार, प्रस्तावित कानून इन दोनों में कोई बदलाव नहीं करता, इसलिए यह संविधान के अनुरूप है।
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव संविधान के मूल ढांचे का नहीं करता उल्लंघन’, पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई का बयान
Latest Articles
सर्वोच्च न्यायालय ने एनआईए मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित करने का...
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने एनआईए मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित करने का निर्देश दिया
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि...
भारत और सिंगापुर आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सूचना साझा करने में तेजी...
नई दिल्ली। भारत और सिंगापुर ने रणनीतिक साझेदार के रूप में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए द्विपक्षीय सहयोग के महत्व पर बल दिया।...
भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा नीति वार्ता का 10वां संस्करण दिल्ली में हुआ आयोजित
नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा नीति वार्ता का 10वां संस्करण नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्रालय के...
भारत-कनाडा सीईपीए वार्ता के दूसरे दौर का दिल्ली में समापन
नई दिल्ली। भारत-कनाडा का संयुक्त वक्तव्य व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता-सीईपीए वार्ता के दूसरे दौर का समापन आज नई दिल्ली में हुआ। यह वार्ता दोनों...
सुभेंदु अधिकारी होंगे पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री
कोलकत्ता। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे। कोलकाता में आज उन्हें भाजपा विधायक दल का नेता...

















