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Monday, February 2, 2026


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मसूरी-खटीमा गोलीकांड को याद कर आज भी सहम जाते हैं लोग

मसूरी: मसूरी-खटीमा गोलीकांड को याद कर आज भी मसूरी वासियों और खटीमा वासियों सहित पूरे उत्तराखंड के लोगों का दिल सहम जाता है। आपको बता दें कि खटीमा गोली कांड की वजह से ही मसूरी गोली-काण्ड हुआ जिससे मसूरी के लोग थर्रा गए। आज भी वो मंजर याद कर मसूरी के लोगों का दिल सहम जाता है जो वक्त मसूरी में निवास कर रहे थे।

आपको बता दें कि मसूरी गोली कांड की घटना खटीमा गोली-काण्ड 1 सितम्बर, 1994 के दूसरे दिन 2 सितम्बर, 1994 को मसूरी में हुई। इस घटना में भी पुलिस ने खटीमा गोली कांड की तरह अपनी बर्बरता का परिचय दिया। 2 सितम्बर, 1994 को मंसूरी में खटीमा गोली काण्ड के विरोध प्रदर्शन करने के लिए लोग एकत्रित हुई। जो शांतिपूर्ण तरीकें से खटीमा गोली काण्ड का विरोध कर रहे थे। प्रशासन से बातचीत करने गई दो सगी बहनों को पुलिस ने गोली मार दी। इस क्रूर घटना का विरोध करने पर पुलिस द्वारा अंधाधुंध फायरिंग कर दी गई, जिसमें कई लोगों को गोली लगी और इसमें से तीन आन्दोलनकारियों की अस्पताल में मौत हो गई थी, लेकिन जनता ने भी इसका विरोध प्रदर्शन जारी रखा और जनता भी हिंसक हो गई।

इस दौरान पृथक राज्य के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ा, जमकर प्रदर्शन हुआ। लोगों के विरोध को रोकने के लिए पुलिस को पीएसी बुलानी पड़ी थी लेकिन जनता के हौसले बुलंद थे। जनता ने पुलिस और पीएसी पर भी हमला कर दिया। जिसमे कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए और पुलिस उपाधीक्षक उमाकांत त्रीपाठी की मौत हो गई। इन दो घटनाओं ने उत्तराखंड को पृथक राज्य का दिलाने में बहुत महत्वपूर्ण काम किया। इन दो गोलीकांड़ों ने देश के सामने उत्तराखंड को पृथक राज्य बनाने की मुहीम में आग में घी डालने का काम किया। इन घटनाओं के विरोध में उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक काफी जनसभाए आयोजित हुईं। इन शहीदों के लहू से ही आज उत्तराखंड को एक पृथक् राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ है।

शहीदों के नाम

अमर शहीद स्व. बेलमती चौहान

अमर शहीद स्व. बलबीर सिंह

अमर शहीद स्व. हंसा धनई

अमर शहीद स्व. राय सिंह बंगारी

अमर शहीद स्व. धनपत सिंह

अमर शहीद स्व. मदन मोहन ममगई

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