नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2027 की जनगणना में नागरिकों की जाति दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापन की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से सोमवार को इन्कार कर दिया।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय से याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार करने को कहा है। यह जनहित याचिका शिक्षाविद आकाश गोयल ने दायर की थी। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने दलील दी कि जाति विवरण दर्ज करने, उसे वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रश्नावली को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
याचिका में आरोप लगाया गया कि जनगणना संचालन निदेशालय ने जाति पहचान दर्ज करने के मानदंड सार्वजनिक नहीं किए हैं, जबकि इस बार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से आगे बढ़कर व्यापक जाति गणना किए जाने की बात स्वीकार की गई है।
पीठ ने स्पष्ट किया कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1958 और उसके तहत बने 1990 के नियमों द्वारा नियंत्रित होती है, जो संबंधित प्राधिकरणों को जनगणना के तरीके और विवरण तय करने का अधिकार देते हैं। गौरतलब है कि 2027 की जनगणना देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी। यह 1931 के बाद पहली बार व्यापक जाति गणना को शामिल करेगी और भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना भी होगी।
जनगणना में जाति गणना प्रक्रिया पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार
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