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Thursday, July 23, 2026


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भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में तेजी से हो रही वृद्धि

केंद्र सरकार की सराहनीय पहल की बदौलत आज भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री भी दोगुनी होने की संभावना नजर आ रही है।

2030 तक 30 फीसदी ईवी हासिल करने का रखा लक्ष्य

इसी के चलते भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नीतियों और प्रोत्साहनों को लागू किया है। इसके लिए सरकार ने वर्ष 2030 तक 30 फीसद का लक्ष्य रखा है।

गौरतलब हो, यह COP26 में पीएम मोदी द्वारा दिए गए “पंचामृत” मंत्र के लिए भारत की प्रतिबद्धता को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होंगे। साथ ही साथ भारतीय युवाओं को रोजगार के बड़े अवसर प्रदान करने में भी मददगार साबित हो रहे हैं।

‘इलेक्ट्रिक वाहनों’ के साथ वैश्विक मोटर वाहन परिदृश्य में बड़ा परिवर्तन

प्रौद्योगिकी के भविष्य के रूप में ‘इलेक्ट्रिक वाहनों’ को बढ़ावा देने के साथ वैश्विक मोटर वाहन परिदृश्य में बड़ा परिवर्तन हो रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों के पुर्जे में नवाचार और तकनीकी सफलताएं इसको उत्प्रेरित कर रही हैं। इसलिए भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण और इसके इस्तेमाल में तेजी लाना आवश्यक समझा गया है और इसी दिशा में काम करने के लिए अब कई कंपनियां आगे आ रही हैं जो विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर इस दिशा में काम कर रही हैं।   

‘ERISHA ई-मोबिलिटी’

इसी क्रम में राणा समूह की सहायक कम्पनी ‘ERISHA ई-मोबिलिटी’ की बात करें तो इस कंपनी ने हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रौद्योगिकी के लिए एक जर्मन कंपनी के साथ साझेदारी की है और इलेक्ट्रिक वाहन लॉन्च किए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार के साथ किया एक MoU

राणा ग्रुप के चेयरमैन डॉ. दर्शन राणा ई मोबिलिटी की यात्रा को आगे बढ़ाने के संबंध में बताते हैं कि उनकी कंपनी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक MoU साइन किया है जिसके तहत यूपी में एक ई-वी पार्क डेवलप किया जाएगा। वहां उनके ग्रुप के साथ-साथ अन्यों की भी फैक्ट्रियां लगेंगी।  कंपोनेंट के वेंडर्स और पार्टनर्स को भी वहीं पर जगह दी जाएगी।

इसके अलावा उन्होंने एक अन्य MoU साइन किए जाने के संबंध में भी जानकारी प्रदान की जिसके  तहत गौतमबुद्ध नगर में ई व्हीकल के 100 चार्जिंग हब स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें एक हब में कम से कम 2 से 10 चार्जिंग स्टेशन होंगे।  

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न नीतियां की लागू

यह पहले से ही ये एनालिसेस किया हुआ था कि अब भारत में हाइड्रोजन को लाना होगा क्योंकि फॉरेन कंट्रीज इसकी तरफ मूव कर चुकी थीं। दर्शन राणा बताते हैं कि पहले ही जो इंसेंटिव पॉलिसीज आई हैं, उससे पहले ही जर्मन और इटेलियन के साथ पार्टनरशिप चालू की थी।

ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर जर्मन पार्टनर से मिलाए हाथ

जर्मन के साथ भारत में जेवी कंपनी बना दी है जो ERISHA हाइड्रोजन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड स्थापित की। इसमें हाइड्रोजन की सारी टेक्नोलॉजी हैं। आपको हाइड्रोजन प्रोडक्शन से लेकर डिस्पेंसिंग तक बल्कि व्हीकल बनाने तक सारी टेक्नोलॉजी इस कंपनी में मिल जाएंगी। इस तकनीक के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।

2030 तक भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों से तेल आयात में होगी 20 लाख करोड़ रुपये की बचत

हमें भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों का विनिर्माण केंद्र बनाने की भी जरूरत है। इलेक्ट्रिक वाहन प्रणाली में भारत के विकास से 2030 तक अकेले तेल आयात में 20 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।

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