नई दिल्ली। सूफी संतों के एक ग्रुप ने रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। बताया गया कि यह मुलाकात भाईचारे और राष्ट्रीय एकता की भावना से की गई। इस दौरान सूफी संस्कृति को लोकप्रिय बनाने की योजनाओं के बारे में बताया गया। इसे उन्होंने कट्टरपंथी सोच के खिलाफ सबसे अच्छा इलाज बताया।
ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल (AISSC) के चेयरमैन और अजमेर दरगाह के मौजूदा आध्यात्मिक प्रमुख और वंशानुगत सज्जादानशीन (संरक्षक) के उत्तराधिकारी हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि एनएसए डोभाल ने हमारे ‘मेरा मुल्क मेरी पहचान’ मिशन की सराहना की और एक मजबूत राष्ट्रीय पहचान के लिए सभी धर्मों को एकजुट करने के प्रयासों का समर्थन किया।
उन्होंने कहा, “हमने अलग-अलग धर्मों और मान्यताओं के बावजूद एक सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान का संदेश फैलाने के लिए ‘मेरा मुल्क, मेरी पहचान’ नाम का एक कैंपेन शुरू किया है।” सूफी काउंसिल के नेताओं की एनएसए डोभाल के साथ बातचीत पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अजमेर शरीफ दरगाह में चादर चढ़ाने के बाद हुई है।
हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने रविवार को कहा, “हम पूरे भारत में लोगों से जुड़ रहे हैं, क्योंकि सभी धर्मों के लोग दरगाहों पर आते हैं।” उन्होंने कहा कि सूफी दरगाहों ने हमेशा सभी धर्मों के लोगों का स्वागत करके कट्टरपंथी ताकतों का मुकाबला करने में भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा, “हमारा देश हमारी ग्लोबल पहचान का मूल है। जब हम दुनिया में कहीं भी जाते हैं तो हमें भारतीय कहा जाता है, हिंदू या मुस्लिम नहीं।” उन्होंने आगे कहा, “हमारा मिशन सूफी विचारों को फैलाने और कट्टरपंथियों का मुकाबला करके राष्ट्रीय एकता सुनिश्चित करने का एक माध्यम है।”
अजमेर दरगाह के सज्जादानशीन ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज का शाश्वत संदेश करुणा का है। उन्होंने कहा, “सबके लिए प्यार और किसी से नफरत नहीं। यही वह संदेश है जिसे काउंसिल फैला रही है।”
सूफी संतों ने अजीत डोभाल से की मुलाकात, कट्टरपंथ को लेकर हुई ये बात
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