नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पति की ओर से दिए गए तलाक-ए-हसन की वैधता को चुनौती देने वाली पत्रकार बेनजीर हीना याचिका को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया। तलाक-ए-हसन मुसलमानों में तलाक का एक रूप है, जिसमें पुरुष तीन महीने की अवधि में हर महीने एक बार तलाक शब्द का बोलकर अपनी पत्नी से रिश्ता खत्म कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले पतियों के वकीलों की ओर से पत्नियों को तलाक नोटिस भेजने की प्रथा पर चिंता जताई थी, क्योंकि इससे बाद में तलाक की वैधता को लेकर विवाद और पत्नियों के पुनर्विवाह के बाद एक से अधिक पति रखने के आरोप लगते हैं। बुधवार को सुनवाई के दौरान, हीना के वकील सैयद रिजवान अहमद ने कहा कि व्यक्तिगत कानून के तहत मिली छूट की अनदेखी नहीं की जा सकती। इसलिए इस तरह की प्रथाएं पवित्र कुरान में नहीं पाई जातीं। हीना के पति के वकील एमआर शमशाद ने बताया कि पत्नी के हलफनामे में उल्लिखित सत्यापित पते पर तीनों तलाक दिए गए थे।
सीजेआई ने कहा, अगर पत्नी तलाक से बच रही है, तो आप उसे स्वतः नोटिस भेजने के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए अखबार में विज्ञापन भी दिया जा सकता है। वह भी नोटिस माना जाएगा। यह व्यक्ति का सवाल है, धर्म का नहीं। जब दोनों पक्ष सौहार्दपूर्ण ढंग से अलग होना चाहते हैं, तो उन्हें आपसी सम्मान बनाए रखना चाहिए। अहमद ने कहा कि हीना सुलह करना चाहती है और इस मामले में मध्यस्थता की पहल करने को तैयार है।
अदालत में कंपनी ने मांग की थी कि जाइडस को यह दवा बेचने से रोका जाए, क्योंकि उसका कहना है कि यह उसके पेटेंट का उल्लंघन है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि पहले दोनों दवाओं की सीधी तुलना की जाए। इसके लिए जाइडस को 24 घंटे के भीतर अपनी दवा का नमूना देने को कहा गया है। तुलना की रिपोर्ट के आधार पर कंपनी हाईकोर्ट में फिर से अंतरिम राहत मांग सकती है। दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही जनहित को ध्यान में रखते हुए जाइडस को दवा बेचने की अनुमति दे चुका है। अदालत ने माना था कि जीवन रक्षक दवा को मरीजों तक पहुंचने से रोकना उचित नहीं होगा, खासकर जब पेटेंट की अवधि मई 2026 में समाप्त होने वाली है। सुनवाई के दौरान जाइडस के वकील ने कहा कि उनकी दवा की कीमत लगभग 30 हजार रुपये प्रति शीशी है, जबकि मूल दवा करीब 1 लाख 8 हजार रुपये में मिलती है। एक कैंसर मरीज को करीब 12 खुराक की जरूरत होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) की पूर्व सचिव को सबरीमला सोना चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत अवधि बढ़ा दी थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की पीठ ने पूर्व टीडीबी सचिव एस जयश्री को दी गई गिरफ्तारी से सुरक्षा को आगे बढ़ाते हुए उन्हें मामले के जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के लिए कहा। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, हम याचिकाकर्ता को निर्देश देते हैं कि वह आगे की पूछताछ के लिए 18 फरवरी को दोपहर 12 बजे एक बार फिर जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित हो। पहले दी गई अंतरिम सुरक्षा अगली सुनवाई की तारीख तक जारी रहेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले को 20 फरवरी के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
नए दिशानिर्देश का नाम ‘सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील नामांकन दिशानिर्देश, 2026’ है। अब एक स्थायी समिति बनाई जाएगी। इसका नाम ‘वरिष्ठ वकील नामांकन समिति’ होगा। इस समिति के अध्यक्ष मुख्य न्यायाधीश होंगे। दो सबसे वरिष्ठ जज इसके सदस्य होंगे। समिति जरूरत पड़ने पर बैठक करेगी। इसका एक स्थायी सचिवालय भी होगा।
सचिवालय की संरचना मुख्य न्यायाधीश तय करेंगे। यह फैसला समिति के सदस्यों से सलाह लेकर होगा। हर साल कम से कम एक बार आवेदन मांगे जाएंगे। वकीलों को ऑनलाइन आवेदन करने के लिए कम से कम 21 दिन का समय मिलेगा। नए दिशानिर्देशों में योग्यता की शर्तें भी तय की गई हैं। उम्मीदवार की उम्र कम से कम 45 साल होनी चाहिए। उसे वकालत में कम से कम 10 साल का अनुभव होना चाहिए। पिछले दो साल में उसका आवेदन खारिज नहीं हुआ होना चाहिए।
जाइडस की सस्ती कैंसर दवा पर सुप्रीम कोर्ट का रोक लगाने से इनकार; TDB के पूर्व सचिव को निर्देश
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