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Friday, March 13, 2026


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‘कोर्ट की रोक के आगे सरकार बेबस’, हिमंत बिस्वा सरमा बोले- हिंसा के बाद शांति बहाली पहली प्राथमिकता

गुवाहाटी: असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले में भड़की हिंसा के बाद हालात अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि चरागाह भूमि से कथित अतिक्रमण हटाने की कार्बी समुदाय की मांग को तुरंत पूरा करना संभव नहीं है, क्योंकि इस मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट की रोक लगी हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून और अदालत के आदेशों से ऊपर कोई सरकार नहीं हो सकती और शांति बहाल करना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि गांव चरागाह रिजर्व (वीजीआर) और प्रोफेशनल ग्रेजिंग रिजर्व (पीजीआर) भूमि से लोगों को हटाने को लेकर हाईकोर्ट का स्थगन आदेश है। ऐसे में सरकार या प्रशासन कोई भी कदम उठाता है तो वह अदालत की अवमानना के दायरे में आएगा। उन्होंने कहा कि असम सरकार ने अब तक जितने भी अतिक्रमण हटाए हैं, वे सभी अदालत की अनुमति के बाद ही किए गए हैं। बिना कानूनी प्रक्रिया के कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।
पिछले दो दिनों में खेरोनी इलाके में हुई हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों में 60 से ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि एक कार्बी युवक की पुलिस फायरिंग में मौत हुई, जबकि एक दिव्यांग व्यक्ति की अपने घर में आग लगने से जिंदा जलकर मौत हो गई। इस हिंसा के दौरान दुकानों और घरों को आग के हवाले किया गया, जिससे इलाके में भारी तनाव फैल गया।
स्थिति को काबू में करने के लिए राज्य पुलिस के साथ-साथ सेना को भी तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के डीजीपी और अतिरिक्त मुख्य सचिव खुद प्रभावित इलाके में मौजूद हैं। सेना द्वारा फ्लैग मार्च किया जा रहा है, जिससे लोगों में सुरक्षा का भरोसा लौटे। उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह से हालात सामान्य हैं और किसी नई अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्बी और बिहारी समुदायों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लोग अब धीरे-धीरे सड़कों और बाजारों में निकलने लगे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले दिनों में स्थिति और बेहतर होगी। सरकार का प्रयास है कि गलतफहमियों को बातचीत के जरिए दूर किया जाए और किसी भी तरह की हिंसा को रोका जाए।
हिमंत बिस्वा सरमा ने साफ शब्दों में कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और हिंसा में बड़ा अंतर है। किसी भी समस्या का समाधान हिंसा से नहीं हो सकता। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और कानून अपने हाथ में न लेने की अपील की। साथ ही कहा कि पहले शांति बहाल होगी, उसके बाद सरकार पूरे मामले की समीक्षा करेगी और कानूनी दायरे में रहकर आगे की कार्रवाई करेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कुछ असामाजिक या बाहरी तत्व हालात बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने किसी पर सीधा आरोप लगाने से इनकार किया और कहा कि सरकार दिसंबर और जनवरी के महीनों में पूरी सतर्कता से काम करेगी।
कार्बी समुदाय के कुछ लोग पिछले 15 दिनों से कथित अवैध बसावट हटाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे। सोमवार तड़के तीन प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा हटाए जाने के बाद हालात बिगड़ गए और हिंसा भड़क उठी। प्रशासन का कहना है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के लिए हटाया गया था, लेकिन इसके बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

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