नई दिल्ली: केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में तीन अहम विधेयक पेश करेगी, जिनका उद्देश्य प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्र शासित प्रदेश के मंत्री को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी या हिरासत की स्थिति में पद से हटाना है। इसमें संविधान, केंद्र शासित प्रदेश और जम्मू-कश्मीर कानूनों में बदलाव किया जाएगा।
केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। इन विधेयकों का उद्देश्य यह है कि अगर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या केंद्र शासित प्रदेश के मंत्री को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है तो उन्हें उनके पद से हटाया जा सके। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा कानूनों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जिससे गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत की स्थिति में ऐसे नेताओं को उनके पद से हटाया जा सके। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने ये तीन विधेयक तैयार किए हैं।
बता दें कि बुधवार को केंद्र सरकार जिन विधेयकों को पेश करने वाली हैं, उनमें केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक, 2025, संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 शामिल है। हालांकि कांग्रेस ने इन विधेयकों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार विपक्ष को अस्थिर करने के लिए ये नया कानून ला रही है।
वहीं कांग्रेस ने इन विधेयकों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार इन विधेयकों के जरिए विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों को निशाना बनाना चाहती है। कांग्रेस प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि भाजपा विपक्ष को कमजोर करने के लिए कानून का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजना है कि केंद्र की एजेंसियों से विपक्षी नेताओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार कराया जाए और फिर नए कानून के तहत उन्हें तुरंत पद से हटा दिया जाए।
सिंघवी ने कहा कि यह कैसी राजनीति है जिसमें बिना किसी ठोस आधार के गिरफ्तारी की जाती है और गिरफ्तारी होते ही मुख्यमंत्री को पद से हटाया जाता है?” उन्होंने इसे गैरकानूनी, असंवैधानिक और लोकतंत्र के खिलाफ बताया। उन्होंने आगे कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी का कोई मुख्यमंत्री इस कानून के दायरे में नहीं आएगा, लेकिन विपक्षी मुख्यमंत्रियों को निशाना बनाया जाएगा। यह साफ तौर पर सत्ता का दुरुपयोग है।
बात अगर अब केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक 2025 की करें तो यह विधेयक केंद्र शासित प्रदेशों का शासन अधिनियम, 1963 में बदलाव करेगा। अभी इस कानून में कोई ऐसा प्रावधान नहीं है जिससे गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाया जा सके। अब सरकार धारा 45 में बदलाव कर ऐसा प्रावधान जोड़ना चाहती है।
वहीं बात अगर संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 की करें तो इस विधेयक के जरिए सरकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन करना चाहती है। इन अनुच्छेदों के तहत प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री और दिल्ली के मुख्यमंत्री व मंत्रियों की नियुक्ति और कार्यकाल से जुड़े प्रावधान हैं। सरकार का उद्देश्य है कि अगर ऐसे किसी व्यक्ति को गंभीर अपराध में गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे कानूनी तौर पर पद से हटाने का अधिकार मिल सके।
यह विधेयक जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में धारा 54 में संशोधन करेगा। अभी इस कानून में भी गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। सरकार अब इसमें स्पष्ट नियम जोड़ना चाहती है।
गौरतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में एक प्रस्ताव भी पेश करेंगे, जिसके जरिए इन तीनों विधेयकों को संसद की एक संयुक्त समिति के पास भेजा जाएगा ताकि इन पर विस्तृत विचार-विमर्श हो सके। इसको लेकर सरकार का कहना है कि इन विधेयकों के जरिए राजनीति को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और नैतिक बनाया जा सकेगा। इससे आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे किसी भी जनप्रतिनिधि को सत्ता से हटाना आसान हो जाएगा और लोकतंत्र की गरिमा बनी रहेगी।
संसद में PM-CM व मंत्रियों से जुड़ा अहम बिल पेश करेगी सरकार, आपराधिक आरोपों पर हटाने जैसे प्रस्ताव
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