नई दिल्ली। सरकार ने कहा है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण आयात में व्यवधान के बावजूद देश के तेल शोधक कारखाने सामान्य रूप से काम कर रह्रे हैं और भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है। पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं पर आज नई दिल्ली में आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने बताया कि किसी भी एलपीजी वितरक केंद्र में आपूर्ति समाप्त होने की कोई रिपोर्ट नहीं है, लेकिन अफवाहों के फैलने के कारण देश के कुछ हिस्सों में घबराहट में खरीदारी देखी गई है। उन्होंने बताया कि कुछ खुदरा एलपीजी बिक्री केन्द्रों पर आपूर्ति फिर से करने के लिए तत्काल कार्रवाई की जा रही है। संयुक्त सचिव ने कहा कि मार्च से अब तक सात लाख से अधिक एलपीजी कनेक्शनों को गैसयुक्त किया जा चुका है और दो लाख छिहत्तर हजार कनेक्शनों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जा चुका है। संयुक्त सचिव ने यह भी बताया कि पिछले चार दिनों में देश में लगभग एक करोड़ बहत्तर लाख घरेलू एलपीजी सिलेंडर वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत से अब तक लगभग एक लाख आठ हजार टन वाणिज्यिक एलपीजी की बिक्री हुई है। सचिव ने कहा कि पिछले चार दिनों में एक लाख नब्बे हजार से अधिक 5 किलोग्राम के सिलेंडर बिके हैं।
रसायन और उर्वरक मंत्रालय की संयुक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि खरीफ सीजन के लिए उर्वरक की उपलब्धता सभी राज्यों में 50 प्रतिशत से अधिक है। संयुक्त सचिव ने बताया कि देशभर में दो लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक उपलब्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रमुख उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संकट काल के बाद घरेलू उत्पादन काफी अच्छा रहा है, लगभग 86.2 लाख मीट्रिक टन और 22 लाख मीट्रिक टन से अधिक आयातित उर्वरक देश में पहुंच चुका है।
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अपर सचिव मुकेश मंगल ने बताया कि मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाला एलपीजी वाहक पोत एसवाईएमआई, जो भारत के लिए लगभग 19 हजार 965 मीट्रिक टन द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर जा रहा था, शनिवार रात गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण पर पहुंचा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 96 घंटों में भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों या विदेशी ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों पर भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई घटना दर्ज नहीं की गई है। श्री मंगल ने आगे कहा कि मंत्रालय नाविकों के कल्याण और निर्बाध समुद्री संचालन सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों और समुद्री हितधारकों के साथ समन्वय कर रहा है।
विदेश मंत्रालय (खाड़ी) के अपर सचिव असीम महाजन ने कहा कि भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास चौबीसों घंटे हेल्पलाइन संचालित कर रहे हैं ताकि समय पर सहायता प्रदान की जा सके और वे देश के नागरिकों की सक्रिय रूप से सहायता कर रहे हैं। श्री महाजन ने बताया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने ज़मीनी सीमा मार्गों से ईरान से 2 हजार 551 भारतीय नागरिकों को बाहर निकालने में सहायता की है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय सरकारी दिशानिर्देशों, उड़ानों और यात्रा संबंधी स्थितियों की जानकारी सहित नियमित रूप से सलाह जारी की जा रही है।

















