23.8 C
Dehradun
Thursday, March 26, 2026


spot_img

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में फिर फटा बादल: उफान पर नाला, घरों-दुकानों में घुसा पानी

उत्तरकाशी: उत्तरकाशी जनपद के नौगांव बाजार के स्योरी फल पट्टी में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। एक आवासीय भवन गदेरे के मलबे में दब गया। आधा दर्जन से भी अधिक भवनों में पानी भर गया है। देवलसारी गदेरे में एक मिक्चर मशीन और कुछ दुपहिया वाहनों के बहने की भी सूचना है। एक कार भी मलबे में दब गई है। खतरे को देखते हुए कई लोग अपने घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।
इससे पहले खबर आ रही थी कि नौगांव के बीच बहने वाला नाला अतिवृष्टि के कारण उफान पर आया है। जिसके कारण कई दुकानों और घरों में पानी घुस गया। वहीं सड़क पर खड़े कई दोपहियावाहन बह गए।
उत्तराखंड के चार पर्वतीय जिलों में भूकंप से भूस्खलन का बड़ा खतरा है। इनमें रुद्रप्रयाग सबसे अधिक संवेदनशील है। पहली बार आईआईटी रुड़की के आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता उत्कृष्टता केंद्र के विशेषज्ञों ने जिलावार अध्ययन करके भूकंप से भूस्खलन के खतरों पर शोध रिपोर्ट जारी की है जो दो अगस्त को ही अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुई है।
बता दें कि उत्तरकाशी जनपद के धराली गांव में एक महीने पहले 5 अगस्त को बादल फटने से खीरगंगा में भयंकर बाढ़ आई थी। जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। जबकि कई लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना थी। इसके अलावा इससे कई होटलों व घरों को भी भारी हानी हुई थी।
उत्तराखंड के चार पर्वतीय जिलों में भूकंप से भूस्खलन का बड़ा खतरा है। इनमें रुद्रप्रयाग सबसे अधिक संवेदनशील है। पहली बार आईआईटी रुड़की के आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता उत्कृष्टता केंद्र के विशेषज्ञों ने जिलावार अध्ययन करके भूकंप से भूस्खलन के खतरों पर शोध रिपोर्ट जारी की है जो दो अगस्त को ही अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुई है।
आईआईटी रुड़की के अक्षत वशिष्ठ, शिवानी जोशी और श्रीकृष्ण सिवा सुब्रमण्यम ने यह शोध किया है। उन्होंने बताया है कि हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। यहां आए दिन भूस्खलन की घटनाएं सामने आती रहती हैं। उन्होंने यह चेतावनी दी है कि भूकंप से प्रेरित भूस्खलन भविष्य में उत्तराखंड के लिए और भी बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं।
अध्ययन में पहली बार उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में भूकंप से होने वाले भूस्खलनों के जोखिम की जिला-स्तरीय जोनिंग की गई है। इसमें अलग-अलग भूकंपीय तीव्रता परिदृश्यों और भूकंप की वापसी अवधि के आधार पर जोखिम का विश्लेषण किया गया। रुद्रप्रयाग जिला सभी परिदृश्यों में सबसे ज्यादा संवेदनशील पाया गया है। इसके बाद पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में भारी भूस्खलन की आशंका जताई गई है।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

खाड़ी देशों ने की ईरान से बगावत! तेहरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का...

0
नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का आज 26वां दिन है। इस युद्ध में ईरान ने अमेरिका से बदला लेने के लिए...

जनजातीय समुदायों का योगदान हर युग में महत्वपूर्ण रहा: केन्द्रीय राज्य मंत्री दुर्गा दास

0
नई दिल्ली: जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने कहा कि जनजातीय समुदायों का योगदान हर युग में महत्वपूर्ण रहा है और...

पश्चिम एशिया की स्थिति पर संसद परिसर में हुई सर्वदलीय बैठक

0
नई दिल्ली: सरकार ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में पश्चिम एशिया की स्थिति पर सर्वदलीय बैठक बुलाई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने...

मुख्यमंत्री ने देहरादून में राज्य जनजातीय महोत्सव में किया प्रतिभाग

0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज परेड ग्राउंड, देहरादून में राज्य जनजातीय शोध संस्थान, उत्तराखंड द्वारा आयोजित उत्तराखंड राज्य जनजातीय महोत्सव 2026 में...

भारतीय ज्ञान परंपरा को तकनीक से जोड़ने वाला ‘प्रज्ञानम्’ लॉन्च

0
देहरादून:  राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने बुधवार को लोक भवन में श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट...