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Wednesday, July 8, 2026


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जस्टिस सूर्यकांत होंगे देश के अगले सीजेआई; 24 नवंबर को ग्रहण करेंगे पदभार

नई दिल्ली: न्यायमूर्ति सूर्यकांत को बृहस्पतिवार को भारत का 53वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया और वह 24 नवंबर को पदभार ग्रहण करेंगे। वह 24 नवंबर को पदभार ग्रहण करेंगे। केंद्रीय विधि मंत्रालय के न्याय विभाग ने उनकी नियुक्ति की घोषणा की है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत न्यायमूर्ति भूषण आर गवई का स्थान लेंगे, जो 23 नवंबर को पदमुक्त हो रहे हैं। जस्टिस सूर्यकांत भारत के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश सीजेआई बीआर गवई के बाद सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। चीफ जस्टिस के रिटायरमेंट के बाद वे भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश होंगे।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को 24 नवंबर, 2025 से भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया है। उन्होंने इस दौरान जस्टिस सूर्यकांत को बधाई भी दी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत भारत के मुख्य न्यायाधीश के बाद सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं और भारतीय न्यायपालिका के प्रमुख बनने की कतार में अगले स्थान पर हैं। पद ग्रहण के बाद, न्यायमूर्ति सूर्यकांत 24 नवंबर को अगले मुख्य न्यायाधीश बनेंगे और 9 फरवरी, 2027 तक लगभग 15 महीने तक इस पद पर बने रहेंगे।
10 फरवरी 1962 को हिसार जिले के पेट्वर गांव में जन्मे सूर्यकांत का बचपन साधारण परिवेश में बीता। उन्होंने प्रारंभिक पढ़ाई गांव के स्कूल से पूरी की और गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, हिसार से 1981 में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से 1984 में कानून (एलएलबी) की पढ़ाई पूरी की। इसी वर्ष उन्होंने हिसार के जिला न्यायालय में वकालत शुरू की और 1985 में चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। जल्द ही उन्होंने सांविधानिक, सेवा और नागरिक मामलों में अपनी गहरी समझ और सशक्त दलीलों से पहचान बनाई।
उनकी न्यायिक यात्रा सामाजिक मुद्दों से जुड़ी रही। वे सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षण, भूमि अधिग्रहण, मुआवजे, पीड़ितों के अधिकार, आरक्षण और सांविधानिक संतुलन जैसे विषयों में संवेदनशील दृष्टिकोण रखते रहे। उनके फैसलों ने सामाजिक न्याय, सांविधानिक मर्यादा और नागरिक अधिकारों को मजबूती दी।
7 जुलाई 2000 को वे हरियाणा के एडवोकेट जनरल नियुक्त हुए। यह पद संभालने वाले सबसे युवा व्यक्ति थे। अगले वर्ष उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता (सीनियर एडवोकेट) का दर्जा मिला। 9 जनवरी 2004 को वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बने। बाद में, 5 अक्तूबर 2018 को उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। वहां उनके प्रशासनिक कौशल और न्यायिक दृष्टिकोण की व्यापक सराहना हुई।

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