नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने आज देशभर के उच्च न्यायालयों में लंबित जमानत आवेदनों के शीघ्र निपटारे के लिए कई उपाय सुझाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की अध्यक्षता वाली पीठ ने पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करते हुए अग्रिम और नियमित जमानत याचिकाओं की समयबद्ध सुनवाई के लिए एक सुदृढ़ तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत आवेदनों की स्वतः सूची बनाने, उनके निपटारे के लिए समय सीमा तय करने और कार्य सूचियों में ऐसे मामलों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। न्यायालय ने शीघ्र निपटान के लिए जमानत याचिकाओं को सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली के माध्यम से साप्ताहिक या पाक्षिक रूप से सूचीबद्ध करने के विकल्प का भी सुझाव दिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कई जमानत आवेदन लंबित है। पटना उच्च न्यायालय में भी देरी को लेकर इसी तरह की चिंताएं व्यक्त की गईं। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी वकीलों द्वारा अनावश्यक स्थगन को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।ये टिप्पणियां पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान की गईं।

















