32 C
Dehradun
Saturday, June 27, 2026


spot_img

Tokyo Olympics 2020: नीरज चोपड़ा ने रचा इतिहास, जीता गोल्ड, भारत को पहली बार एथलेटिक्स में मेडल

टोक्यो ओलंपिक 2020 में आज भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने फाइनल मुकाबला खेला। इससे पहले नीरज ने ग्रुप-ए के क्वालिफिकेशन राउंड में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहले ही प्रयास में फाइनल में प्रवेश कर लिया था। फाइनल में नीरज चोपड़ा जोरदार शुरुआत की। नीरज ने फाइनल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए भारत को टोक्यो ओलंपिक में पहला गोल्ड मेडल दिलाया। नीरज ने अपने पहले ही प्रयास में 87.03 मीटर जैवलिन फेंका। नीरज के बाद जर्मनी के जूलियन वेबर ने सबसे दूर भाला फेंका है। उन्होंने 85.30 मीटर दूर भाला फेंका. वहीं, जर्मनी के ही जोहानेस वेटर का थ्रो 82.52 मीटर रहा। वहीं नीरज चोपड़ा ने दूसरे प्रयास में भी शानदार थ्रो किया। दूसरे प्रयास में उन्होंने 87.58 मीटर दूर भाला फेंका।

पुरुषों की जैवलिन थ्रो के फाइनल में दो राउंड बीतने के बाद पहले स्थान पर चल रहे भारतीय थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने तीसरे प्रयास में बेहद खराब थ्रो की। तीसरे प्रयास में उन्होंने 76.79 मीटर तक ही थ्रो फेंका। हालांकि इसके बाद भी अब भी वह अपनी 87.58 मीटर की बेस्ट थ्रो के बूते पर पहला स्थान पर बरकरार रहे। वहीं पाकिस्तान के अरशद नदीम ने पहले प्रयास में 82.40 मीटर दूर भाला फेंका। दूसरा प्रयास उनका फाउल रहा। वहीं नीरज अपने चौथे प्रयास में फाउल कर बैठे। हालांकि इसके बाद भी वह पहले स्थान पर कायम रहे। नीरज का पांचवां प्रयास भी आयोग्य करार दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद वह स्वर्ण पदक की दौड़ में सबसे आगे बने रहे।

फाइनल में क्वालिफाई करने के लिए 83.50 मीटर का बेंचमार्क रखा गया था, लेकिन जूनियर विश्व रिकॉर्डधारी नीरज चोपड़ा ने पहले ही प्रयास में शानदार थ्रो किया और फाइनल में प्रवेश कर लिया था। उन्होंने पहले ही प्रयास में 86.65 मीटर का थ्रो कर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया था। नीरज के अलावा फिनलैंड के Lassi Etelatalo ने भी पहले ही प्रयास में फाइनल के लिए सीधे क्वालिफाई किया था। उन्होंने अपने पहले प्रयास में 84.50 मीटर का थ्रो किया और क्वालिफिकेशन मार्क को पार किया था।

पानीपत स्टेडियम में नीरज, वरिष्ठ जेवलिन (भाला फेंक) खिलाड़ी जयवीर को प्रैक्टिस करते देख प्रभावित हुए और इसके बाद उन्होंने जैवलिन थ्रोअर बनने की ठान ली। शुरुआत में वह जयवीर द्वारा फेंके गए जैवलिन को उठाकर लाने का काम करते थे, इस बीच जब भी उन्हें टाइम मिलता वह भाला फेंकने की प्रैक्टिस करते थे। उन्होंने जैवलिन फेंकने की जयवीर की तकनीक को समझा और उनसे प्रेरित होकर आगे बढ़ा। इसके बाद से ही इन्होंने जैवलिन खिलाड़ी बनने के लिए मेहनत शुरू की थी।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

देशभर में ‘नशा मुक्त भारत सप्ताह’ की गतिविधियों में 1.31 करोड़ से अधिक नागरिकों...

0
हरिद्वार/देहरादून।  देश भर में आयोजित नशा मुक्त भारत सप्ताह का समापन शुक्रवार को उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम...

राज्य बनने के बाद पहली बार पांच मीट्रिक टन रेनबो ट्राउट मछली का निर्यात

0
देहरादून। राज्य निर्माण के बाद पहली बार उत्तराखंड की मछली इंटरनेशनल मार्केट में पहुंची हैं। पिथौरागढ़ जिले की तीन सहकारी समितियों ने राज्य सरकार...

चुनौतियों का समाधान खोजने में कृषि वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्णः शिवराज सिंह

0
पंतनगर/देहरादून। पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में आयोजित दो दिवसीय पूर्व छात्र सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण...

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान व सीएम धामी ने किया खेत बचाओ अभियान का...

0
रुद्रपुर/देहरादून। गांधी मैदान, रुद्रपुर में कृषि विभाग द्वारा आयोजित खेत बचाओ अभियान कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक रहेंगे सेशेल्स के राजकीय दौरे पर

0
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने की 27 से 29 तारीख तक सेशेल्स के राजकीय दौरे पर रहेंगे। वे सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस...