नैनीताल। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने रविवार को लोकभवन में आयोजित सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में प्रतिभाग कर प्रदेशवासियों एवं देश-विदेश में योग साधना से जुड़े सभी साधकों को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस भारत की सनातन संस्कृति, ऋषि परम्परा और आध्यात्मिक चेतना के वैश्विक उत्कर्ष का महापर्व है। उन्होंने कहा कि आज सम्पूर्ण विश्व भारत की उस अमूल्य ज्ञान परम्परा के समक्ष श्रद्धापूर्वक नतमस्तक है, जिसने मानवता को स्वास्थ्य, संतुलन, शांति और आत्मबोध का शाश्वत मार्ग प्रदान किया है।
राज्यपाल ने कहा कि योग भारत की आत्मा, हमारी संस्कृति का प्राण और सनातन सभ्यता की वह शाश्वत चेतना है, जिसने व्यक्ति को आत्मबोध, समाज को समरसता और विश्व को ‘वसुधैव कुटुम्बक’ का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि योग शरीर, मन, बुद्धि, आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का सेतु है तथा यह केवल साधना नहीं, बल्कि संतुलित, श्रेष्ठ और सार्थक जीवन जीने का सनातन विज्ञान है।
राज्यपाल ने कहा कि हिमालय की यह तपोभूमि अनादिकाल से योग, ध्यान और आध्यात्मिक साधना की भूमि रही है। यहीं से प्राप्त ज्ञान ने योग के रूप में सम्पूर्ण मानवता को आत्मोन्नति और अमृतमय जीवन का मार्ग प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि गंगा, हिमालय और हमारे पावन तीर्थ आज भी आत्म उन्नति, संयम और विश्वकल्याण की दिव्य परम्परा के जीवंत प्रतीक हैं।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि आज योग वैश्विक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। संयुक्त राष्ट्र ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की मान्यता भारत की सांस्कृतिक शक्ति और आध्यात्मिक विरासत का ऐतिहासिक सम्मान है। उन्होंने कहा कि योग भारत की ऐसी सॉफ्ट पावर है जिसने सम्पूर्ण विश्व के हृदय को स्पर्श किया है।
राज्यपाल ने कहा कि योग हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य और सह-अस्तित्व का संदेश देता है। यह संयमित जीवन और संतुलित उपभोग की प्रेरणा देता है तथा संरक्षण एवं पर्यावरणीय संतुलन के प्रति हमारी जिम्मेदारी का बोध कराता है। उन्होंने कहा कि योग ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ की भावना का व्यावहारिक स्वरूप है और सम्पूर्ण मानवता के लिए स्वास्थ्य, सद्भाव एवं शांति का पथ प्रशस्त करता है।
राज्यपाल ने कहा कि योग को व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज, समाज से राष्ट्र और राष्ट्र से विश्व कल्याण की महायात्रा का माध्यम बनाना हमारी सनातन संस्कृति का संदेश और विकसित भारत की दिशा में हमारा सामूहिक संकल्प है। उन्होंने सभी से योग को अपने जीवन का संस्कार, परिवार की परम्परा और राष्ट्र निर्माण का आधार बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में कुमाऊँ विश्वविद्यालय के योग विभाग के छात्रों द्वारा योगाभ्यास एवं लयबद्ध योग प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर परिसहाय राज्यपाल अमित श्रीवास्तव, सुमित कुमार शादिजा, संयुक्त निदेशक सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय एवं कम्पट्रोलर प्रमोद चमोली सहित लोक भवन के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
योग भारत की आत्मा, हमारी संस्कृति का प्राण और सनातन सभ्यता की शाश्वत चेतनाः राज्यपाल
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