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Saturday, August 8, 2026


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महाकुंभ से अर्थव्यवस्था को मिली रफ्तार, मार्च के अंत तक चार ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी देश की इकोनॉमी

नई दिल्ली। तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू मांग की मजबूती से दुनिया में सबसे तेज गति से विकास करने का सिलसिला कायम है। चालू वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में भारत के जीडीपी की विकास दर 6.2 प्रतिशत दर्ज की गई जो चीन, अमेरिका, इंडोनेशिया, ब्राजील जैसे तमाम विकसित व विकासशील देशों की तुलना में अधिक है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत यह है कि महाकुंभ के भव्य आयोजन, सार्वजनिक कंपनियों के पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी और गैर पेट्रोलियम व गैर जेम्स व ज्वैलरी निर्यात में बढ़ोतरी से चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में विकास दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
चौथी तिमाही में जीडीपी के अच्छे प्रदर्शन से चालू वित्त वर्ष में जीडीपी विकास दर 6.5 प्रतिशत रहने का उम्मीद जताई गई है। इस विकास दर को हासिल करने से इस साल मार्च अंत में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार वर्तमान मूल्य पर चार ट्रिलियन डॉलर के पास पहुंच जाएगा। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने बताया कि प्रयागराज में महाकुंभ के भव्य आयोजन से ट्रांसपोर्ट, फूड, होटल जैसे कई उद्योगों को बल मिला है।
महाकुंभ का असर जीडीपी में दिखेगा
50-60 करोड़ लोग महाकुंभ में शामिल हुए जिससे खर्च में बढ़ोतरी हुई और उसका प्रभावशाली असर चौथी तिमाही के जीडीपी में दिखेगा। उन्होंने कहा कि पहली और दूसरी तिमाही के दौरान सार्वजनिक खर्च में चुनाव की वजह से कमी रही लेकिन अब इसमें काफी तेजी आई है और इस साल जनवरी तक पूंजीगत व्यय अनुमान का 75 प्रतिशत खर्च हो चुका है। इसके अलावा गैर पेट्रोलियम एवं गैर जेम्स व ज्वैलरी सेक्टर के निर्यात में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
ग्रामीण व शहरी दोनों ही खपत में बढ़ोतरी हो रही है। इसलिए चौथी तिमाही में 7.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी वास्तविक दिख रही है। नागेश्वरन ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के अंत में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 3.92 ट्रिलियन डॉलर का हो जाएगा और हम करीब-करीब चार ट्रिलियन डॉलर के स्तर को छू लेंगे।
चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग का प्रदर्शन फिर से कमजोर रहा। कृषि और सर्विस सेक्टर की बदौलत छह प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर हासिल की जा सकी। हालांकि कैपिटल गुड्स के आयात में भारी बढ़ोतरी और निजी निवेश में होने वाली बढ़ोतरी से आने वाले महीनों में मैन्यूफैक्चरिंग में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में निजी निवेशकों ने दो लाख करोड़ से भी कम मूल्य की नई परियोजना की घोषणा की थी। तीसरी तिमाही में सात लाख करोड़ की नई परियोजना का ऐलान निजी निवेशकों ने किया है। इन सब के बावजूद वैश्विक व्यापार में शुल्क और प्रतिबंध में हो रही बढ़ोतरी, डॉलर के मुकाबले रुपए में आ रही लगातार कमजोरी और स्टॉक मार्केट में लगातार हो रही गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरा साबित हो सकती है।

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